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सिंगोली में उमड़ा आस्था का जनसैलाब: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मुनिश्री से लिया आशीर्वाद, दो प्रमुख कृतियों का किया विमोचन

डेस्क न्यूज़ 07 April, 2026


सिंगोली (नीमच)। नीमच जिले के सिंगोली में आयोजित भव्य पंचकल्याणक महोत्सव के छठे दिन आस्था और आध्यात्मिकता का एक दुर्लभ संगम देखने को मिला। हज़ारों श्रद्धालुओं की भक्ति और जयकारों से पूरा क्षेत्र धर्ममय हो गया। इस गरिमामयी अवसर पर देश के लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए।

मुनिश्री का सानिध्य और ग्रंथों का विमोचन
कार्यक्रम का शुभारंभ अत्यंत आध्यात्मिक वातावरण में हुआ, जहाँ योग प्रेरक मुनिश्री 108 प्रणम्य सागर महाराज के सानिध्य में धर्मसभा आयोजित की गई। लोकसभा अध्यक्ष ने मुनिश्री को श्रीफल भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने मुनिश्री द्वारा रचित दो महत्वपूर्ण कृतियों “आयुर्वेद सूत्रकम” और “वैराग्य वाटिका” का विधिवत विमोचन किया। उपस्थित जनसमूह ने करतल ध्वनि के साथ इस पल का स्वागत किया।


विश्व शांति के लिए जैन दर्शन अनिवार्य: ओम बिरला
अपने संबोधन में लोकसभा अध्यक्ष ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों पर प्रकाश डालते हुए कहा:
"आज के दौर में विश्व शांति का मार्ग केवल अहिंसा, संयम और आत्मचिंतन से ही संभव है। जैन दर्शन के सिद्धांत मानव जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी हैं और इन्हें अपनाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।"
उन्होंने मुनिश्री के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उनके माध्यम से योग और आत्मचिंतन का संदेश आज विदेशों तक पहुँच रहा है। साथ ही, उन्होंने जैन संत आचार्य विद्यासागर जी का स्मरण करते हुए उनके जीवन को त्याग, तप और अनुशासन का सर्वोच्च उदाहरण बताया।

प्रमुख जनप्रतिनिधियों की रही उपस्थिति
समारोह में लोकसभा अध्यक्ष के साथ सांसद सुधीर गुप्ता और विधायक ओमप्रकाश सखलेचा सहित कई अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। आयोजन समिति द्वारा सभी अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया और उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

सफलता का मूल मंत्र: आत्म-नियंत्रण
ओम बिरला ने युवाओं और श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि सच्ची सफलता वही है जहाँ व्यक्ति अपने मन, शरीर और इंद्रियों पर नियंत्रण रख सके। उन्होंने आध्यात्मिकता को जीवन को सही दिशा देने का सबसे सशक्त माध्यम बताया।

पंचकल्याणक महोत्सव के इस सफल आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि हमारी संस्कृति और आस्था की जड़ें आज भी समाज में बहुत गहरी और मजबूत हैं।

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