डेस्क न्यूज
10 March, 2026
नीमच। सांड की टक्कर से घायल हुए सुधीर चौहान की मौत के बाद उठे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। परिजनों द्वारा जिला अस्पताल, ज्ञानोदय मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल और एम्बुलेंस चालक पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बीच अब अस्पताल प्रबंधन ने सामने आकर इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
ज्ञानोदय मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल की ओर से जारी प्रेसनोट और फिर द वॉचमैन पोस्ट से बातचित में सभी आरोपों को बेबुनियाद और तथ्यहीन बताया । अस्पताल के आयुष्मान हेड डॉ. प्रदीप जैन के अनुसार 2 मार्च की रात सुधीर चौहान को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। परिजनों ने बताया था कि इंदिरा नगर के भगवानपुरा चौराहे पर सांड के धक्के से वह घायल हुए थे।
डॉ. जैन ने बताया कि अस्पताल पहुंचते ही मरीज अचेत अवस्था में था, आंखों की पुतलियां फैली हुई थीं और कान से खून बह रहा था। हालत बेहद नाजुक होने के कारण परिजनों की सहमति से तुरंत ऑपरेशन किया गया और मरीज को ICU में भर्ती कर लगातार इलाज किया गया।
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, आयुष्मान कार्ड की जानकारी अगले दिन दी गई, जिसके बाद पूरा इलाज आयुष्मान योजना के तहत किया गया। केवल 15 हजार रुपये आपातकालीन जांच और सुरक्षा निधि के रूप में जमा करवाए गए थे।
अस्पताल के डायरेक्टर राजा चौरसिया ने भी साफ शब्दों में कहा कि दो लाख रुपये नकद लेने के आरोप पूरी तरह झूठे हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल में चारों तरफ सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं, जिनकी जांच कोई भी कर सकता है।
उन्होंने कहा, “अगर किसी ने पैसा दिया है तो उसकी रसीद जरूर होगी। हमारे रिकॉर्ड में केवल 15 हजार रुपये ही जमा हैं, बाकी इलाज आयुष्मान योजना से हुआ है।
इस पूरे मामले में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह आमलीखेड़ा ने भी महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने बताया कि सांड की टक्कर के बाद घायल सुधीर को वह खुद जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे और राहत कार्य में लगे रहे।
उनके अनुसार, जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने ज्ञानोदय भेजने के लिए दबाव नहीं बनाया, बल्कि केवल रेफर करने की बात कही थी। परिजन अटेंडर की कमी के चलते अपनी मर्जी से मरीज को ज्ञानोदय अस्पताल लेकर गए। उन्होंने एम्बुलेंस चालक को भी निर्दोष बताया और कहा कि दो लाख रुपये नकद लेने की बात उन्हें भी सही नहीं लगती, इलाज आयुष्मान योजना से ही हुआ है।
हालांकि इस मामले में अब परिजनो की और से कोई बयान सामने नही आया है, मरीज की मौत के बाद अस्पताल में प्रदर्शन कर रहे शुभचिंतकों ने भी परिजनों से बात करने को कहा. उधर द वॉचमेन पोस्ट ने मृतक के परिजनों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन पर कोई जवाब नहीं मिल सका।
बहरहाल इस मामले में दोनों पक्ष आमने सामने हो चुके हैं। अस्प्ताल प्रबंधन ने स्पष्ट रूप से अपना पक्ष रखा है, अब प्रशासन की जांच में ही दूध का दूध और पानी का पानी हो सकेगा। मामले पर नज़र बनाए हुए लोगों की नजरें अब प्रशासनिक जांच पर टिकी हुई है।