कपिलसिंह चौहान
22 February, 2026
नीमच। शहर के निजी चिकित्सालयों में राजस्थान व अन्य राज्यों के डॉक्टर्स द्वारा अवैध रूप से बगैर पंजीयन प्रेक्टिस करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। माननीय हाईकोर्ट ने इस मामले में नीमच के निजी चिकित्सालयों और उन में प्रेक्टिस कर रहे ऐसे डॉक्टर्स के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए नीमच सीएमएचओ को सख्त कारवाई के निर्देश दिए। परंतु जब मेडिकल काउंसिल, मध्यप्रदेश और नीमच जिला चिकित्सालय के सीएमएचओ ने लापरवाही दिखाते हुए रसूखदार चिकित्सालयों और डॉक्टर्स के खिलाफ हाईकोर्ट के आदेश के 7 माह बाद भी कोई प्रभावी कारवाई नहीं की तो अब हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना करने पर नीमच सीएमएचओ सहित अन्य अधिकारियों पर कंटेम्प ऑफ़ कोर्ट की तलवार लटक रही है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दरख्वास्त पर अब अंतिम रूप से समय सीमा बढ़ाते हुए नीमच के इन प्रायवेट हॉस्पिटल्स और डॉक्टर्स पर कारवाई ना करने पर अधिकारीयों के खिलाफ कारवाई की चेतावनी दी है जिससे मामला गरमा गया है.
अवैध प्रेक्टिस, आयुष्मान और उपचार में धांधली की शिकायत
नीमच में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही और अदालती आदेशों की अवहेलना का यह मामला नीमच के 'ज्ञानोदय मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल' सहित अन्य निजी चिकित्सालयों में बाहरी राज्यों के डॉक्टरों द्वारा बगैर 'मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल' (MPMC) में पंजीकरण कराए अवैध रूप से प्रैक्टिस करने से जुड़ा है। एक माह पूर्व मिले निर्देशों के बाद सीएमएचओ, नीमच के पास अब केवल 2 महीने का समय है। इस अवधि में उन्हें ज्ञानोदय हॉस्पिटल सहित जिले के अन्य निजी अस्पतालों में अवैध रूप से प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टरों और संस्थानों पर सख्त कानूनी कदम उठाने होंगे। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा सख्त रुख अपनाए जाने के बावजूद स्थानीय प्रशासन की सुस्ती ने अब अधिकारियों को ही कानूनी कटघरे में खड़ा कर दिया है।
विस्तृत जानकारी अनुसार यह मामला सिर्फ नीमच के निजी चिकित्सालयों में अवैध रूप से डॉक्टर्स के प्रेक्टिस करने नहीं बल्कि भ्रामक विज्ञापनों के जरिये रोगियों को भ्रमित करने, आयुष्मान का लाभ ना देने और पीढ़ित रोगी का उपचार सक्षम डॉक्टर के बजाय सामान्य चिकित्सक से कराने से सबन्धित है।
शिकायत और अनदेखी (अगस्त 2024)
09 अगस्त 2024 को नीमच जिला निवासी राधेश्याम मेघवाल ने नीमच के स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल काउंसिल को शिकायत की कि ज्ञानोदय अस्पताल में कई डॉक्टर ऐसे हैं जिनका मध्यप्रदेश में कोई वैध रजिस्ट्रेशन नहीं है, जो कि 'म.प्र. आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम' का सीधा उल्लंघन है।
जांच के घेरे में और भी अनियमितताएं (Irregularities and Violations)
दस्तावेजों के अनुसार, कोर्ट के समक्ष शिकायतों और जांच में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं।
बगैर रजिस्ट्रेशन प्रैक्टिस: ज्ञानोदय अस्पताल को मेडिकल काउंसिल द्वारा जारी नोटीस में पूछा गया कि डॉ.अभिलेख त्रिपाठी व डॉ.सोमराजन सहित सहयोगी डॉक्टर्स दूसरे राज्यों से आकर नीमच में अवैध रूप से प्रैक्टिस कर रहे थे ? जबकि नियमानुसार मध्यप्रदेश में कार्य करने के लिए 'एमपी मेडिकल काउंसिल' में पंजीयन अनिवार्य है।
भ्रामक विज्ञापन मामला :
इसके साथ ही हाईकोर्ट में लगाई गयी याचिका में उल्लेख है की ज्ञानोदय हॉस्पिटल और अन्य संस्थानों द्वारा स्थानीय समाचार पत्रों में बड़े-बड़े विज्ञापन देकर जनता को गुमराह किया जा रहा है, जिसमें अपंजीकृत डॉक्टरों को विशेषज्ञ के रूप में पेश किया जाता है। मरीज इनके विज्ञापन से प्रभावित हो कर इलाज करवाने पहुंचते हैं और कई बार उपचार अन्य सामान्य चिकित्सकों द्वारा किया जा रहा है।
आयुष्मान भारत योजना में धांधली के आरोप: शिकायत कर्ता ने आरोप लगाया कि उसके साथ आयुष्मान भारत योजना के तहत किए गए उपचार में भी प्रोटोकॉल का घोर उल्लंघन हुआ है।
पीड़ित की उक्त बिन्दु वार शिकायतों पर स्वास्थ विभाग द्वारा 19 अगस्त 24 को नोटिस तो जारी किये गए लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। याचिकाकर्ता राधेश्याम मेघवाल के अनुसार रसूखदार चिकित्सालय और चिकित्सकों के खिलाफ कारवाई करने से कतरा रहे अधिकारियों और सीएमएचओ के उदासीन रवैये से तंग आकर जुलाई 2025 में उन्होंने इंदौर हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। इस पर जुलाई माह में न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता की 09/08/2024 की शिकायत पर 4 महीने के भीतर उचित निर्णय लिया जाए और कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। जब चार महीने बीत जाने के बाद भी सीएमएचओ आर.के.खद्योत और मेडिकल काउंसिल ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो याचिकाकर्ता ने 'Contempt of Court' (अवमानना याचिका) दायर की।
अवमानना याचिका पर कोर्ट का सख्त रुख
जनवरी 2026 में अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने फिर से कड़ा आदेश दिया है । कोर्ट ने प्रतिवादियों को "सकारात्मक रूप से" (Positively) पिछले आदेश का पालन करने के लिए अंतिम अवसर दिया। साथ ही CMHO को भी अंतिम चेतावनी दी.
प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल
हाईकोर्ट के दो बार स्पष्ट आदेश के बावजूद नीमच स्वास्थ्य विभाग द्वारा ज्ञानोदय अस्पताल के डॉक्टर्स पर कोई दंडात्मक कार्रवाई न करना, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि रसूखदार अस्पताल प्रबंधन के दबाव में अधिकारी मौन साधे हुए हैं। याचिकाकर्ता राधेश्याम मेघवाल ने बताया कि व्यक्तिगत रूप से CMHO, नीमच डॉ.आर के खद्योत को न्यायालय के आदेश की प्रमाणित प्रति सौंपी है । जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि 3 महीने के भीतर इन अवैध प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सीधे जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कारवाई हेतु जेल भेजने की प्रक्रिया (Contempt Proceedings) शुरू करेंगे।
द वॉचमैन पोस्ट द्वारा जानकारी लिए जाने पर जिला चिकित्सालय के तात्कालीन सीएमएचओ डॉ.खद्योत ने कहा कि," मुझे मामले की जानकारी नहीं है और 30 जनवरी से मैं संस्पेंड चल रहा हूँ, फिलहाल सीएमएचओ डॉ. प्रसाद हैं।"
सीएमएचओ डॉ.डी प्रसाद ने कहा कि,"मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल के निर्देश पर नोटीस जारी किए गए थे। कोर्ट के आदेश की जानकारी नहीं है। जानकारी ले कर ही कुछ ठोस बता पाऊँगा। माननीय न्यायालय द्वारा जो भी निर्देश दिए गए हैं उनका अक्षरश: पालन किया जाएगा।"
मामले में ज्ञानोदय मल्टी स्पेशलिटी के संचालक राजा चौरसिया से जानकारी लेना चाही तो उनका नंबर नो-रिप्लाय आया।
यूरोलॉजिस्ट डॉ. अभिलेख त्रिपाठी से सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि," मेरे द्वारा मरीज का ऑपरेशन नहीं किया गया था। बल्कि ऑपरेशन के बाद दूसरी बार जब मरीज दीपक मेघवाल को स्टेंट निकलवाने के लिए ज्ञानोदय चिकित्सालय लाया गया तब मैंने उन्हे सिर्फ परामर्श दिया था और उसके बाद परिजनों ने अहमदाबाद ले जाकर स्टेंट निकलवाया और पथरी का उपचार करवाया। कोई मुझे जानबूझकर फंसा रहा है, मेरे द्वारा MPMC को जवाब पेश किया जा चुका है, मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल में मेरा पंजीयन हो चुका है।"
15 चिकित्सकों पर कारवाई हेतु जवाब तलब
बड़ी और महत्त्वपूर्ण बात यह है कि मध्यप्रदेश मेडिकल काउन्सिल,भोपाल ने नीमच में अन्य राज्यों के बगैर पंजीकृत प्रेक्टिस कर रहे एक-दो नहीं बल्कि 15 चिकित्सकों पर कारवाई को लेकर ज्ञानोदय मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल से जवाब तलब किया है। 16 जनवरी 26 को माननीय न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों में भी पंजियक, मप्र मेडिकल काउंसिल और CMHO नीमच को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि 3 माह के भीतर न्यायालय के पूर्व आदेश का पालन नहीं किया जाता है तो परिणाम दोनों को भुगतने होंगे और वे अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए उत्तरदायी होंगे।
जांच के दायरे में हैं ये मुद्दे
-हालांकि जानकारी मिली है कि एक- दो चिकित्सकों ने मेडिकल काउंसिल, मध्यप्रदेश में अब पंजीयन करवा लिए हैं।
-विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ.अभिलेख त्रिपाठी ने ऑपरेशन से इनकार किया है और उधर मरीज के परिजनों का कहना है कि वे विज्ञापन देख कर डॉ.अभिलेख त्रिपाठी से ही इलाज करवाने गए थे लेकिन डिस्चार्ज समरी में डॉ. सोमराजन के हस्ताक्षर हैं जो कि सिर्फ जनरल सर्जन हैं, यूरोलॉजी विशेषज्ञ नहीं। तो डॉ. सोमराजन ने कैसे और क्यों मरीज का ऑपरेशन किया ?
-दूसरा यह कि ऑपरेशन किए जाने पर आयुष्मान क्यों लागू नहीं किया गया? दूसरी बार स्टेंट निकाले जाने के लिए मरीज जब अस्पताल पहुंचा तो उसे बताया गया कि पथरी अब भी शरीर में मौजूद है। इस बार आयुष्मान से इलाज करने को राजी होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन द्वारा 20,000 रुपये की अतिरिक्त मांग क्यों की गई ? जिसके बाद मरीज को अहमदाबाद, शेलबी अस्पताल में इलाज करवाने जाने हेतु बाध्य होना पड़ा जहां उसका इलाज आयुष्मान के तहत हुआ।
-इसके साथ ही न्यायालय के निर्देशानुसार रजिस्ट्रार, मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल और सीएमएचओ को इस मुद्दे पर भी जवाबदेही के साथ कारवाई करना है कि आखिर अन्य राज्य के 15 चिकित्सक नीमच में अवैध रूप से प्रैक्टिस कैसे कर रहे थे ?
मामले में अगले अपडेट और परत दर परत खुलासे के लिए पढ़ते रहिये द वाचमैन पोस्ट