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बुलडोज़र की गड़गड़ाहट में दबे सपने : मनासा में गरीबों की बस्ती उजड़ी, न्याय की आस में भटकते परिवार

डेस्क न्यूज 20 February, 2026 अन्य

“जहां कल तक चूल्हों से धुआँ उठता था, आज वहीं मलबे की धूल उड़ रही है… मनासा की श्मशान रोड पर गरजा बुलडोज़र और कई घरों के साथ कई सपने भी ढह गए।”

 

नीमच\मनासा | जिले के मनासा में अवैध अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्यवाही गुरुवार को उस वक्त मानवीय त्रासदी में बदल गई, जब श्मशान रोड स्थित झुग्गी बस्ती पर नगर परिषद का बुलडोज़र गरजा और देखते ही देखते करीब 2 हेक्टेयर भूमि को खाली करवा दिया गया। इस कार्रवाई में लगभग 30 गरीब परिवारों के आशियाने जमींदोज हो गए।

बताया जा रहा है कि अचानक हुई कार्रवाई से परिवारों को अपना सामान तक निकालने का मौका नहीं मिला। कुछ ही मिनटों में रसोई का राशन, बच्चों की किताबें, बिस्तर और बरसों की जमा-पूंजी मलबे में दब गई। जिन दीवारों में उम्मीदें बसती थीं, वहां अब सिर्फ धूल और टूटी यादें बची हैं।


रोते-बिलखते परिवारों की पीड़ा

कार्रवाई के बाद सामने आए वीडियो में महिलाएं-बच्चे फूट-फूटकर रोते दिखे। पीड़ितों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना पर्याप्त सूचना दिए बुलडोज़र चला दिया।
उनका कहना है— हमें घर से सामान तक निकालने नहीं दिया… राशन, कपड़े, बिस्तर सब मलबे में दब गया… अब हम कहां जाएं?

बरसात और ठंड के मौसम के बीच खुले आसमान के नीचे आए इन परिवारों के सामने अब सिर छुपाने का भी संकट खड़ा हो गया है।

 कलेक्टर से न्याय की गुहार

बेघर हुए परिवार शुक्रवार को जिला मुख्यालय पहुंचे और कलेक्टर कार्यालय के बाहर गुहार लगाई। उन्होंने नगर परिषद के कर्मचारियों और अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए और मांग की कि उन्हें उसी स्थान पर रहने दिया जाए या वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।

 सीएमओ का पक्ष

वहीं मनासा नगर परिषद के सीएमओ संजय पाटीदार का कहना है कि श्मशान रोड पर लगभग 2 हेक्टेयर शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाया गया है।
उनके अनुसार— पहले नोटिस दिया गया था, लोगों को सामान निकालने का समय दिया गया उसके बाद ही नियमानुसार कार्रवाई की गई
 उन्होंने यह भी बताया कि उक्त भूमि पर एक शासकीय प्रोजेक्ट प्रस्तावित है, जिसके कारण अतिक्रमण हटाना आवश्यक था।


 सवालों के घेरे में मानवीय संवेदनाएं

कानूनी प्रक्रिया अपनी जगह है, लेकिन सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या गरीबों की बस्ती हटाने से पहले पुनर्वास या वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की जानी चाहिए थी?
बुलडोज़र ने सिर्फ दीवारें नहीं तोड़ीं—उसने उन परिवारों की सुरक्षा, सम्मान और भविष्य की नींव भी हिला दी।
अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं—क्या बेघर परिवारों को राहत और न्याय मिलेगा, या मलबे में दबे उनके सपने यूं ही धूल बन जाएंगे?

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