द वाॅचमेन पोस्ट
10 February, 2026
सामाजिक
नीमच। संगीत सिर्फ़ सुर नहीं, संस्कृति और स्वास्थ्य की ताक़त है। भारतीय संस्कृति में संगीत की आत्मा बसती है—यह संदेश पूरे प्रभाव और गरिमा के साथ उस वक्त गूंजा, जब श्री सीताराम जाजू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नीमच में “संगीत, संस्कृति एवं नवाचार” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का भव्य शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि, प्रसिद्ध संगीत प्रेमी एवं समाजसेवी जम्बुकुमार जैन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक संगीत जीवन को आच्छादित करता है और यह मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य के लिए प्रभावी थेरेपी भी है।
कार्यशाला के प्रथम दिवस तकनीकी सत्रों में मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर के संगीत विभागाध्यक्ष डॉ. पामिल मोदी ने सुर, राग और संगीत की विधाओं पर जीवंत प्रस्तुति दी। “होंठों से छूलो तुम…” जैसे मधुर गीत के माध्यम से उन्होंने प्रतिभागियों से सीधा संवाद करते हुए संगीत की बारीकियों को सरल और प्रभावी ढंग से समझाया। उनके साथ हारमोनियम पर हरिओम तिवारी और तबले पर ऋतिक कुमावत की संगत ने वातावरण को संगीतमय बना दिया।
इससे पहले महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. प्रतिभा कालानी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि संगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भावनात्मक अभिव्यक्ति, मानसिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति का सशक्त माध्यम है। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रसिद्ध संगीत प्रेमी श्रीमती जयश्री वर्मा मंचासीन रहीं। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ, जबकि संगीत विभाग की छात्राओं ने सरस्वती वंदना व स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का संचालन संगीत विभागाध्यक्ष प्रो. संजय बिजौलिया ने किया और आभार प्रदर्शन डॉ. अमृता सोनी ने किया। मीडिया प्रभारी डॉ. पी.सी. रांका ने बताया कि देशभर से 100 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीयन कराया है, वहीं यूट्यूब लाइव के माध्यम से भी बड़ी संख्या में संगीत साधकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
कार्यशाला के दूसरे दिन 11 फरवरी को इंदौर के सुप्रसिद्ध संगीत शास्त्र प्रवक्ता अभय मानके तृतीय व चतुर्थ सत्र में संगीत कला की बारीकियों और नवाचार पर विशेष मार्गदर्शन देंगे।