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नामांतरण खारिज होने के बाद भी खसरे में चढ़ा नाम, पटवारी-तहसील स्तर पर मिलीभगत के गंभीर आरोप, पीड़ितों ने कलेक्टर से की शिकायत

न्यूज डेस्क 04 February, 2026 अन्य

नीमच। जिले के ग्राम चौथखेड़ा से राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। प्रकरण क्रमांक 1380/अ-6/2025-26 (कृष्णा गुर्जर विरुद्ध धापूबाई आदि) में तहसीलदार न्यायालय द्वारा 20 जनवरी 2026 को नामांतरण आवेदन निरस्त किए जाने के बावजूद उसी दिन खसरे में नाम दर्ज किए जाने का आरोप लगा है। इस पूरे मामले को लेकर प्रभावित पक्ष ने कलेक्टर जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।
प्रार्थीगण बाबूलाल गायरी सहित छह लोगों ने कलेक्टर को दिए आवेदन में बताया कि ग्राम चौथखेड़ा स्थित उनकी स्वामित्व व आधिपत्य की भूमि सर्वे नंबर 398/1, रकबा 0.45 हेक्टेयर है। आरोप है कि उक्त भूमि का बिना आपसी बंटवारे और उनकी जानकारी के धापूबाई पति लक्ष्मीनारायण व अन्य द्वारा कृषि भूमि के रूप में विक्रय कर दिया गया। मामले की जानकारी मिलने पर प्रार्थीगण ने 19 और 20 जनवरी 2026 को नामांतरण के विरुद्ध तहसीलदार न्यायालय में लिखित आपत्तियां प्रस्तुत की थीं।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि तहसीलदार नीमच नगर द्वारा सुनवाई के बाद 20 जनवरी 2026 को नामांतरण आवेदन विधिवत निरस्त कर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद उसी दिन खसरे में संबंधित आवेदकों के नाम से इंद्राज कर दिया गया। पीड़ितों का आरोप है कि यह न केवल राजस्व नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि पूरे मामले को संदेह के घेरे में लाता है।
नामांतरण निरस्त होने के बाद भी खसरे में नाम दर्ज होने की जानकारी मिलते ही पीड़ितों ने 28 जनवरी 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) को लिखित आवेदन देकर मामले की जांच की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से पीड़ित पक्ष में गहरा रोष व्याप्त है।
पीड़ितों का कहना है कि जब न्यायालय स्तर से नामांतरण की अनुमति खारिज हो चुकी थी, तब बिना किसी सक्षम आदेश के खसरे में नाम कैसे दर्ज किए गए—यह पटवारी और अन्य राजस्व अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बिना वैध आदेश के रिकॉर्ड में बदलाव प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।
कलेक्टर जनसुनवाई में दिए गए आवेदन में मांग की गई है कि अवैध रूप से किए गए इंद्राज को तत्काल प्रभाव से हटाकर भूमि की पूर्व स्थिति बहाल की जाए तथा जिन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका इसमें सामने आए, उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस संवेदनशील प्रकरण में कितनी तत्परता और निष्पक्षता से जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है।

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