ताजासमाचार

EXCLUSIVE : मनासा नहीं, नीमच में निकला जीबीएस का पहला मरीज़, डॉक्टरों से चूकी बीमारी, प्रशासन बेख़बर रहा, पांच दिन में ढाई लाख के इंजेक्शन… गरीब की सांसों पर भारी इलाज

तबरेज अगवान  18 January, 2026

The Watchman Post तबरेज अगवान 
नीमच। गिलियन बैरे सिंड्रोम (GBS) जैसी घातक और दुर्लभ बीमारी को लेकर जिले में मचे हड़कंप के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य तंत्र, डॉक्टरों की दक्षता और प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है।
नीमच

चौंकाने वाली बात यह है कि जिस बीमारी को प्रशासन मनासा से जोड़ रहा है, उसका पहला पुष्ट मामला नीमच में 24 दिसंबर को ही सामने आ चुका था, लेकिन न डॉक्टर बीमारी पहचान पाए और न प्रशासन को भनक लगी।

24 दिन से मौत से जंग लड़ रहा बुज़ुर्ग

बगीचा नंबर-13, नीमच निवासी 65 वर्षीय गुलाबसिंह जादोन, पिता मदनसिंह जादोन, बीते 24 दिनों से जीबीएस जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रहे हैं। मरीज के अनुसार, बीमारी से पहले उन्हें किसी भी तरह की कोई तकलीफ नहीं थी।

अचानक कमर दर्द शुरू हुआ, फिर हाथ-पैरों ने साथ छोड़ दिया। नसों में जकड़न बढ़ती चली गई और स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि जुबान तक काम करना बंद कर गई।

चार अस्पतालों में इलाज चला, लाखों रुपये खर्च हुए, लेकिन बीमारी की सही पहचान नहीं हो सकी। आज हालत यह है कि मरीज सिर्फ बोल पा रहे हैं, खड़े होने की ताकत अब भी शरीर में नहीं लौटी।

चार दिन, दो बड़े अस्पताल…
फिर भी बीमारी नहीं पकड़ी

मरीज के पुत्र अजय जादोन ने अपने पिता का इलाज नीमच के आशा हॉस्पिटल (डॉ. अभिषेक तिवारी) और श्रीराम हॉस्पिटल (डॉ. सुरेश कुमावत) में करवाया।

चार दिन तक चले इलाज के बावजूद जिले के ये दोनों बड़े अस्पताल बीमारी की गंभीरता नहीं समझ पाए, न ही जीबीएस की पुष्टि कर सके।

हालत बिगड़ने पर मरीज को बड़नगर के काबरा हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां हजारों की जांच के बाद डॉक्टरों ने जीबीएस की पुष्टि की और तत्काल IVIG इंजेक्शन शुरू कराने की सलाह दी।

उदयपुर में लगी मुहर, फिर शुरू हुआ महंगा इलाज

बीमारी की दोबारा पुष्टि और बेहतर इलाज के लिए परिजन मरीज को उदयपुर के गीतांजलि हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। यहां बड़नगर की रिपोर्ट की पुष्टि हुई और डॉक्टरों ने पांच दिन तक रोजाना पांच IVIG इंजेक्शन लगाने का प्रोटोकॉल बताया।

एक इंजेक्शन की कीमत: ₹10,000
कुल इंजेक्शन: 25
कुल खर्च: ₹2,50,000 (ढाई लाख रुपये)
मनासा नहीं, नीमच में आया पहला मामला

गुलाबसिंह जादोन 24 दिसंबर को जीबीएस से ग्रस्त हुए, जबकि प्रशासनिक रिकॉर्ड में नीमच में जीबीएस का खुलासा 13 जनवरी को दो बच्चों की मौत के बाद माना जा रहा है।

मनासा में अब तक
2 बच्चों की मौत
17 संदिग्ध मरीज

नीमच में
वार्ड नंबर-1, चावला कॉलोनी का एक संदिग्ध मरीज

इसका साफ मतलब है कि जीबीएस का पहला पुष्ट मरीज मनासा नहीं, बल्कि नीमच में था, लेकिन डॉक्टर बीमारी को समय रहते पहचान नहीं सके।

गरीब की पहुंच से बाहर इलाज

जीबीएस में राहत की उम्मीद सिर्फ IVIG इंजेक्शन से बताई जा रही है, जिसकी कीमत आम आदमी की पहुंच से कोसों दूर है।

डॉक्टरों के अनुसार इंजेक्शन मरीज के वजन के हिसाब से लगाए जाते हैं और इसमें लाखों रुपये का खर्च आता है।

सबसे गंभीर सवाल यह है कि—
आयुष्मान कार्ड लागू नहीं है और
सरकारी योजनाएं बेअसर साबित हो रही है।
सरकार और प्रशासन से द वॉचमेन पोस्ट की सीधी मांग
मध्यप्रदेश शासन IVIG इंजेक्शन की तत्काल सरकारी व्यवस्था करे
GBS को आयुष्मान भारत योजना के दायरे में शामिल किया जाए
जिला स्तर पर डॉक्टरों को जीबीएस की पहचान और उपचार का विशेष प्रशिक्षण दिया जाए

वरना हर बार की तरह लापरवाही की कीमत मरीज और गरीब परिवार चुकाते रहेंगे।

Related Post