द वॉचमेन पोस्ट
01 December, 2025
आज प्रादेशिक समाचार पत्र ‘दैनिक भास्कर’ ने नीमच शहर में जनहित का महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए ‘20 से ज्यादा ईंट भट्टों का जहरीला धुंआ उखाड़ रहा सांसे’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया।
समाचार में उल्लेख है की कलेक्ट्रेट परिसर के ठीक सामने रहवासी क्षेत्र के मध्य में 20 से अधिक भट्टों से निकला धुंआ आसपास के 3 हजार से अधिक विद्यार्थीयों और रहवासियों के स्वास्थ सहित शहर के वातावरण पर बुरा असर डाल रहा है…आज जन स्वास्थ्य से जुड़ी इस खबर पर समाचार पत्र को धन्यवाद देते हुए खबर में एसडीएम संजीव साहू के वर्जन का रिव्यू करते हैं,
क्योंकी जिम्मेदारों की जवाबदेही तो अब तय करना ही होगी..
नीमच।(द वॉचमेन पोस्ट) आज दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर में ईंट भट्टों के खिलाफ कुछ शिकायतकर्ताओं का जिक्र है...खास तौर से इंगित किया गया की नीमच की आबोहवा को खराब कर रहे ये भट्टे कलेक्ट्रेट परिसर के ठीक सामने स्थित हैं...जिसके मायने हैं की नीमच तहसीलदार, एसडीएम और एडीएम से लेकर कलेक्टर तक जिले के सारे आला अधिकारी भट्टों के अस्तित्व और इससे दुष्परिणामों से वाकीफ होंगे ।
नीमच एसडीएम होने के नाते प्राथमिक रूप से शहर में राजस्व, कानून‑व्यवस्था और लोक‑स्वास्थ्य की रक्षा की सीधी जिम्मेदारी अनुविभागीय अधिकारी संजीव साहू की बनती है । ऐसे में खबर पर उनके द्वारा दिए वर्जन से समझ आता है कि क्या एसडीएम वाकई अपनी भूमिका और कर्तव्यों के प्रति सजग हैं ?
पहले खबर पर शब्दश: प्रकाशित 10 माह से नीमच एसडीएम का दायित्व संभाल रहे संजीव साहू का अखबार को दिया वर्जन पढ़िए ।
“मामला हाल ही में संज्ञान में आया है, कलेक्टर कार्यालय के सामने ही ईंट भट्टे जल रहे हैं और इनसे स्कूली और छात्रावास के बच्चों की सेहत पर असर पड़ रहा है। इसकी जांच करवाएंगे। साथ ही शिकायत मिलने पर कारवाई करेंगे। बच्चों की सेहत के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे” - एसडीएम संजीव साहू
खबर में एसडीएम का बयान कुल मिलाकर औपचारिक आश्वासन तक सीमित दिखाई देता है, उनके संज्ञान में मामला है फिर भी वे शिकायत मिलने पर कारवाई करने की बात कर रहे हैं। जबकि प्रदूषण और स्वास्थ्य‑संकट की गंभीरता देखते हुए यह रुख अपर्याप्त और रक्षात्मक लगता है। उनके पद की संवैधानिक‑कानूनी जिम्मेदारियों की तुलना में गंभीर मुद्दे पर उनका यह बयान सामर्थ्य के अनुरूप दिखाई नहीं देता है।
एसडीएम की भूमिका और कानूनी कर्तव्य
एसडीएम क्षेत्रीय कार्यपालिका के प्रमुख अधिकारी होते हैं; राजस्व, कानून‑व्यवस्था और लोक‑स्वास्थ्य की रक्षा उनकी सीधी जिम्मेदारी है, खासकर जब किसी एक गतिविधि (यहां ईंट‑भट्टे) से बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य को नुकसान हो रहा हो। औद्योगिक प्रदूषण के मामले में वे बगैर किसी शिकायत के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पुलिस, पंचायत/नगर निकाय और शिक्षा विभाग को समन्वित कर तुरंत राहत, अस्थायी रोक (closure/सीज़‑फ़ायर आदेश) और दीर्घकालिक नियमन सुनिश्चित करने के लिए अधिकृत हैं। उनके बयान के विश्लेषण से प्रतीत होता है कि एसडीएम ने मुख्य रूप से “जांच करेंगे, कार्रवाई होगी, जैसे सामान्य वाक्य कहे, जिनमें ठोस समय‑सीमा, तय कार्रवाई (जैसे भट्टों की वैधता, कितने भट्टे बंद होंगे, कितने पर जुर्माना) और पारदर्शिता की बात स्पष्ट नहीं है। यह भाषा प्रशासनिक “रूटीन जवाब” जैसी लगती है जो जन‑दबाव को शांत तो करती है, पर माता‑पिता, छात्रों और शहर वासियों को यह भरोसा नहीं देती कि अगले कुछ दिनों में धुआं कम हो जाएगा या स्कूल‑कॉलेज के बच्चों की सुरक्षा के लिए तत्काल कोई कदम उठाया जाएगा।
कर्तव्य बनाम वास्तविक कार्रवाई
समाचार में बताया गया है कि दर्जनों भट्टों से निकला धुआं 3–4 हजार से ज़्यादा विद्यार्थियों और आसपास के हज़ारों ग्रामीणों की सांस, आंखों और फेफड़ों पर असर डाल रहा है; यह स्थिति “तत्काल हस्तक्षेप” की श्रेणी में आती है, जहां एसडीएम को अस्थायी रूप से संचालन रोकने, दूरी‑मानदंड लागू कराने, नियंत्रित ईंट भट्टा चलाने, कुछ तकनीकी बदलाव कर ईंट भट्टा उद्ध्योग संचालन जैसी शर्तें तुरंत लागू करानी चाहिए । यदि वर्षों से शिकायतें चल रही हों और अब भी “मामला संज्ञान में आया है, जांच कराएंगे” जैसे वाक्य कहे जा रहे हों, तो यह उनके निगरानी‑कर्तव्य में कमी को दिखाता है; नियम‑पालन की नियमित समीक्षा, निरीक्षण आदी में सख्ती न होना यह प्रशासनिक ढिलाई का संकेत है।
जवाबदेही और अपेक्षित रवैया
एसडीएम से अपेक्षित है कि वे (1)- तुरंत संयुक्त टीम बनाकर सभी भट्टों का निरीक्षण, (2)- जो भी स्कूल/बस्ती 500–1000 मीटर के भीतर हैं उनके लिए सुरक्षा‑प्लान, (3)- नियम तोड़ने वाले भट्टों की सूची और उन पर की जाने वाली शीघ्र कार्रवाई सार्वजनिक रूप से साझा करें । खबर में स्थानीय लोगों के “झगड़े के डर से सामने न आने” की बात भी कही गई है, तो यह प्रशासन पर विश्वास की कमी को दिखाता है; ऐसी स्थिति में एसडीएम का दायित्व है कि व्हिसल ब्लोअर सुरक्षा, गोपनीय शिकायत‑व्यवस्था और आम रहवासीयों से चर्चा के माध्यम से लोगों को आश्वस्त करें कि वे बिना डर के शिकायत कर सकते हैं और उनकी सुरक्षा प्रशासन की जिम्मेदारी है, न कि सिर्फ़ कागज़ी आश्वासन।
समग्र रूप से, खबर से प्रतीत होता है कि एसडीएम का बयान समस्या की गंभीरता को शब्दों में स्वीकार तो करता है पर समाधान के लिए न तो ठोस रोडमैप देता है, न ही समयबद्ध लक्ष्य; यह उनकी विधिक‑प्रशासनिक भूमिका की पूरी क्षमता का उपयोग नहीं दिखाता। अपेक्षित है कि एक जवाबदेह और सक्रिय रवैये में वे खुद स्थल निरीक्षण, तात्कालिक रोक के आदेश और नियमित मॉनिटरिंग‑रिपोर्ट की सार्वजनिक घोषणा करें, ताकि नागरिकों को लगे कि प्रशासन उनके साथ खड़ा है, न कि सिर्फ़ कागज़ पर कार्रवाई का भरोसा दे रहा है। उम्मीद है की मीडिया के माध्यम से उठाये गए जनहित के मुद्दों पर प्रशासनिक अधिकारी संवेदन शीलता से जिम्मेदारी पूर्वक त्वरित संज्ञान और निराकरण की सही परम्परा का पालन करेंगे ।
यूँ तो आधुनिक प्रतिस्पर्धा के दौर में अपने संस्थान में किसी अन्य मीडिया संस्थान की खबर का जिक्र और उसकी प्रशंसा की परम्परा नहीं है लेकिन मुद्दा जनहित का हो तो एक मत हो कर इस परम्परा को तोड़ा जाना उचित है । और फिर द वॉचमेन पोस्ट यहाँ लीक से हटकर चलने के लिए ही है… इसलिए आज से पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए हम इस तरह के ‘न्यूज रिव्यू’ को अपना स्थाई स्तम्भ बनाये रखने का प्रयत्न करेंगे । पढ़ते रहें, आपका अपना द वॉचमेन पोस्ट । धन्यवाद