डेस्क न्यूज़
01 November, 2025
नीमच। मंदसौर जिले के ग्राम चंगेरी में संचालित एक बायोटेक फैक्ट्री के प्रदूषण फैलाने के आरोपों ने नीमच और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में चिंता की लहर पैदा कर दी है। सिमखेडा (ग्राम पंचायत चल्दु, तहसील जीरन) के ग्रामीणों ने शनिवार को फैक्ट्री के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए नीमच कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्री द्वारा नालों और नदी में जहरीला रासायनिक अपशिष्ट छोड़े जाने से पर्यावरण और पशुधन दोनों पर संकट मंडरा रहा है।
ज्ञापन ग्राम पंचायत चल्दु के सरपंच महेंद्र सिंह शक्तावत के नेतृत्व में कलेक्टर प्रतिनिधि को सौंपा गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कृपा बायोटेक कंपनी, जो चंगेरी (तहसील मल्हारगढ़, जिला मंदसौर) में स्थित है, ने बिना पर्यावरणीय अनुमति और ग्राम पंचायत की सहमति के औद्योगिक उत्पादन आरंभ कर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार, फैक्ट्री से निकलने वाला अपशिष्ट सीधे रेतम नदी और आसपास के तालाबों में जा रहा है, जिससे जल स्रोत दूषित हो गए हैं।
मछलियों और मवेशियों की मौत से फैला आक्रोश
ग्रामीणों ने बताया कि जहरीले रासायनिक जल के कारण गांव के तालाबों में मछलियां मर चुकी हैं, जबकि दो गायों की भी मृत्यु हो चुकी है। खेतों की फसलें सूखने लगी हैं और वातावरण में रासायनिक गंध फैलने से सांस लेना तक दूभर हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि स्थिति दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है।
सड़कों की बदहाली और ग्रामीणों की नाराज़गी
ग्रामीणों ने फैक्ट्री से जुड़ी भारी वाहनों की आवाजाही पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि रोजाना दर्जनों ट्रक सिमखेडा गांव होकर गुजरते हैं, जिससे मुख्य सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। गांव में धूल और गड्ढों की वजह से आवाजाही कठिन हो गई है।
“धमकी भी मिली शिकायत पर” — सरपंच
सरपंच महेंद्र सिंह शक्तावत ने बताया कि ग्रामीणों ने जब फैक्ट्री प्रबंधन से 31 अक्टूबर को इस विषय पर चर्चा की, तो अधिकारियों ने न केवल समाधान देने से इंकार किया, बल्कि धमकी दी कि शिकायत करने पर झूठे प्रकरण में फंसा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि “फैक्ट्री संचालक बिना पर्यावरण अनुमति के ट्रायल के नाम पर संचालन कर रहे हैं। जहरीले अपशिष्ट से जल स्रोत प्रदूषित हो रहे हैं और सड़कों की हालत खराब हो चुकी है।”
प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि फैक्ट्री संचालन पर तत्काल रोक लगाई जाए, क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत करवाई जाए और प्रभावित किसानों को मुआवजा दिलवाया जाए। साथ ही, पर्यावरण विभाग से फैक्ट्री की जांच करवाई जाए ताकि जल, वायु और भूमि प्रदूषण की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे सामूहिक आंदोलन करेंगे और इसके परिणामों की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
पर्यावरण और जनजीवन पर दोहरा खतरा
इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक गतिविधियों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन पर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विकास के नाम पर यदि जीवन और पर्यावरण से समझौता किया गया, तो इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।