डेस्क न्यूज़
22 October, 2025
नीमच। त्योहार केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होते, वे जब परंपरा और संस्कृति से जुड़ते हैं, तो समाज की असल तस्वीर उभर कर सामने आती है। नीमच शहर में दिवाली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा के अवसर पर घंटाघर स्थित सर्राफा बाजार उस सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक बन गया, जहां 150 वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत विशेष 'पारंपरिक सब्ज़ी मंडी' का आयोजन हुआ।
सब्ज़ियों की नहीं, संस्कृति की ख़रीद
बुधवार सुबह तड़के से ही पूरा बाजार सब्ज़ियों की महक और ख़रीदारों की चहलकदमी से गुलजार हो गया। आलू, भिंडी, लौकी, गाजर, मूली, टमाटर और अन्य हरी सब्जियों की ढेरियों के बीच घूमते नागरिक, एक तरफ़ अन्नकूट की तैयारी कर रहे थे, तो दूसरी ओर नीमच की सांस्कृतिक जड़ों को संजो भी रहे थे।
दीपावली के बाद परंपरा का उजियारा
कहा जाता है कि यह विशेष मंडी उस समय शुरू हुई थी जब व्यापारियों ने गोवर्धन पूजा के दिन सामूहिक अन्नकूट भोग के लिए ताज़ा सब्जियों की सुविधा हेतु यह पहल की थी। अब यह आयोजन केवल एक मंडी नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक उत्सव का रूप ले चुका है।
आम मंडी नहीं, खास आयोजन
आमतौर पर शहर की सब्जी मंडी अलग स्थान पर लगती है, लेकिन गोवर्धन पूजा के दिन यह परंपरा सर्राफा बाजार में आकर बस जाती है। व्यापारी संगठनों और स्थानीय निवासियों के सहयोग से यह मंडी हर साल विशेष रूप से सजाई जाती है।
आस्था, परंपरा और बाजार का अनूठा संगम
सब्जी खरीदते लोगों के चेहरों पर न केवल त्योहार की खुशी दिख रही थी, बल्कि इस ऐतिहासिक परंपरा में भागीदारी की सामूहिक चेतना भी झलक रही थी।
इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि त्योहारों का असली रंग न केवल दीपों में है, बल्कि उन रीतियों में है जो पीढ़ियों से समाज को जोड़ती आई हैं।