डेस्क न्यूज़
01 October, 2025
नीमच | राष्ट्रीय बधिरता निवारण एवं नियंत्रण कार्यक्रम (NPPCD) के अंतर्गत वीरेंद्र कुमार सखलेचा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, नीमच एवं जिला चिकित्सालय, नीमच में 22 से 28 सितंबर 2025 तक अंतर्राष्ट्रीय बधिर सप्ताह का सफल आयोजन किया गया। इस दौरान विभिन्न जनजागरूकता गतिविधियाँ, परामर्श सत्र, व्याख्यान और मरीजों की स्क्रीनिंग की गई। साथ ही अस्पताल के मातृत्व वार्ड, प्रसूति वार्ड एवं पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में विशेष अभिविन्यास कार्यक्रम आयोजित किए गए।
कार्यक्रम का संचालन मेडिकल कॉलेज के नाक, कान एवं गला रोग विशेषज्ञ डॉ.अरविंद गुप्ता एवं डॉ.अक्षिता भार्गव के मार्गदर्शन में किया गया। विशेषज्ञों ने इस अवसर पर माताओं और परिजनों को शिशुओं में श्रवण हानि की शीघ्र पहचान और समय पर हस्तक्षेप के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यदि कोई बच्चा तेज आवाज़ पर प्रतिक्रिया नहीं देता, आवाज़ की दिशा में सिर नहीं घुमाता, छह माह की उम्र के बाद भी बड़बड़ाना शुरू नहीं करता या परिचित आवाज़ों पर प्रतिक्रिया नहीं देता तो यह श्रवण हानि के प्रारंभिक संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्यकर्मियों को संकेत भाषा (Sign Language) के महत्व और उसके प्रयोग का भी प्रशिक्षण दिया गया, ताकि श्रवण बाधित व्यक्तियों के साथ बेहतर संवाद स्थापित किया जा सके और उनकी देखभाल को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। इस आयोजन को सफल बनाने में नोडल अधिकारी डॉ. मनीष यादव, मेडिकल कॉलेज की नोडल अधिकारी सुमोक्षी तिवारी (NPPCD) एवं जिला प्रबंधक दिनेश मालवीय (NPPCD) की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
सिविल सर्जन डॉ. महेन्द्र पाटिल ने कहा कि श्रवण हानि की शीघ्र पहचान और समय पर उपचार ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है। इस प्रकार के कार्यक्रम जनजागरूकता फैलाने और समय पर इलाज सुनिश्चित करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होते हैं।
मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ.आदित्य बेराड़ ने अपने संदेश में कहा कि इन गतिविधियों का उद्देश्य समाज में श्रवण स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, संकेत भाषा के उपयोग को प्रोत्साहित करना तथा बच्चों में श्रवण हानि की समय पर पहचान कर उनका उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करना है।