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गांधीसागर में चीतों के आशियाने में नए सदस्य की आमद; 'प्रभास' और 'पावक' को मिला 'धीरा' का साथ

डेस्क न्यूज़ 18 September, 2025 अन्य

मंदसौर | मध्यप्रदेश की धरती एक बार फिर चीते की रफ्तार से गूंज उठी है। लेकिन इस बार कहानी कूनो की नहीं, गांधीसागर की है। पांच महीने पहले जहां नर चीते ‘प्रभाष’ और ‘पावक’ ने इस वीरान जंगल को रफ्तार की सरगर्मी दी थी, अब वहीं मादा चीता ‘धीरा’ की एंट्री ने वन्य जीवन के इस अध्याय में नया मोड़ जोड़ दिया है। बुधवार की शाम रावलीकुड़ी गांव के पास बनाए गए विशेष बाड़े में जैसे ही धीरा के पिंजरे का दरवाज़ा खुला — वह खुले मैदान में बिजली सी फूटी और दौड़ पड़ी। एक नए घर में पहली बार कदम रखते हुए उसका यह आत्मविश्वास वन अधिकारियों की उम्मीदों पर खरा उतरा।


धीरे नहीं, तेज़ी से बदलेगा परिदृश्य
चीता पुनर्वास योजना अब सिर्फ प्रयोग नहीं, बल्कि रणनीति बन चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू हुआ अफ्रीकी चीतों का भारत आगमन अब धीरे-धीरे देश के नक्शे पर नई बस्तियों की शक्ल ले रहा है। गांधीसागर, जो कभी केवल अभयारण्य था, अब चीतों की नई रणभूमि बन गया है।


गांधीसागर में अब तीन शिकारी
20 अप्रैल को जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दो नर चीतों को गांधीसागर की ज़मीन पर छोड़ा था, तब ये महज़ एक शुरुआत थी। अब धीरा के आगमन के साथ वन विभाग की रणनीति स्पष्ट हो चुकी है — यहां न केवल संरक्षण होगा, बल्कि प्राकृतिक प्रजनन के ज़रिए चीतों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी।


20 सदस्यीय सुरक्षा कवच, आठ वाहन, एक चीता
बुधवार सुबह कूनो नेशनल पार्क से चली एक चुनी हुई टीम — जिसमें 20 विशेषज्ञ, आठ वाहन और विशेष निगरानी उपकरण शामिल थे। शाम होते-होते, धीरा को बाड़े में छोड़ा गया, जहां उसकी हर हरकत पर पैनी निगाह रखी जा रही है। फिलहाल धीरा को नर चीतों से अलग रखा जाएगा। लेकिन योजना यह है कि जब वह नए परिवेश से पूरी तरह परिचित हो जाए, तब उसे प्रभाष और पावक के साथ मुख्य क्षेत्र में छोड़ा जाएगा — ताकि चीतों की अगली पीढ़ी की नींव यहीं से रखी जा सके।


27 और गिनती जारी है...
प्रधान मुख्य वन संरक्षक शुभरंजन सैन के मुताबिक, देश में अब चीतों की कुल संख्या 27 हो चुकी है। गांधीसागर में इनकी मौजूदगी सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि संरक्षण नीति की सफलता का प्रतीक बन चुकी है।

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