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नीमच सहित प्रदेशभर में तहसीलदार और नायब तहसीलदार हड़ताल पर

राजस्व अधिकारियों का न्यायिक-विभाजन विरोध तेज

डेस्क न्यूज़ 06 August, 2025

 

राजस्व अधिकारियों का न्यायिक-विभाजन विरोध तेज 

नीमच। राजस्व अधिकारियों के न्यायिक और गैर-न्यायिक विभाजन के विरोध में प्रदेशभर के तहसीलदार और नायब तहसीलदार बुधवार 6 अगस्त से कार्यों से विरत हो गए हैं। नीमच जिले में भी करीब 15 तहसीलदार एवं नायब तहसीलदारों ने हड़ताल शुरू कर दी है।अधिकारियों ने आपदा प्रबंधन को छोड़कर अन्य सभी कार्यों का बहिष्कार करते हुए अपने शासकीय वाहनों की चाबियां जमा कर दी हैं और डिजिटल सिग्नेचर डोंगल सीलबंद कर जिला अध्यक्ष को सौंप दिए ओर कलेक्टर कार्यालय परिसर में ही धरने पर बैठ गए हैं।

नायब तहसीलदार संघ के जिला प्रभारी बालकृष्ण मकवाना एवं तहसीलदार संघ के नवीन गर्ग (तहसीलदार जावद) ने बताया कि यह निर्णय गूगल मीट के माध्यम से आयोजित एक आपात बैठक में लिया गया। बैठक में प्रदेश के 45 जिलों से लगभग 250 से अधिक कार्यकारिणी सदस्यों ने भाग लिया। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जब तक न्यायिक और गैर-न्यायिक विभाजन की योजना को सरकार द्वारा पूर्ण रूप से वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

संवर्ग ने स्पष्ट कहा है कि यह विभाजन संरचनात्मक, विधिक और व्यावहारिक रूप से समस्यापूर्ण है। शासन द्वारा दिए गए पूर्व आश्वासन के अनुसार, यह योजना केवल 12 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू होनी थी, लेकिन इसके विपरीत अन्य 9 जिलों में भी इसे लागू कर दिया गया। इससे संवर्ग में भारी आक्रोश है। गैर-न्यायिक अधिकारियों को आवश्यक संसाधन और स्टाफ भी उपलब्ध नहीं कराए गए, जिससे कार्यों की दक्षता प्रभावित हो रही है।

नीमच जिले सहित प्रदेश भर में बुधवार से शुरू हुई इस हड़ताल में अधिकारी जिला मुख्यालय पर उपस्थित रहेंगे, लेकिन राजस्व संबंधी किसी भी कार्य का निष्पादन नहीं करेंगे। प्रतिदिन शाम 6 बजे जिला कार्यालय में उपस्थिति पत्रक पर हस्ताक्षर कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
यह हैं मांगे-   
संवर्ग की प्रमुख मांग है कि यदि कार्यपालिक दंडाधिकारी की शक्तियों के आधार पर यह विभाजन किया गया है तो इन शक्तियों को पुलिस या सामान्य प्रशासन विभाग को हस्तांतरित किया जाए, जिससे राजस्व अधिकारियों को उनके मूल राजस्व कार्यों से विचलित न किया जाए। प्रशासन से अपील की गई है कि इस विभाजनकारी योजना को तत्काल निरस्त कर, संवर्ग की गरिमा, कार्यक्षमता और मनोबल को सुरक्षित रखा जाए।
संवर्ग ने यह भी चेताया है कि यदि शासन ने शीघ्र सुनवाई नहीं की तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

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