न्यूज डेस्क
08 July, 2025
प्रशासनिक
नीमच। एक ही नाम की दो कंपनिया क्रेडिट काॅ-आॅपरेटिव सोसायटी के खिलाफ उपभोक्ता लामबंद हुए और कलेक्ट्रेट में हाथो में तख्तीयां लिए जमकर नारेबाजी की और कंपनी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्यवाही की मांग की। ज्ञापन में बताया गया कि "अक्षय क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी मनासा" और "अक्षय क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी मंदसौर" — इन दोनों अलग-अलग पंजीकृत संस्थाओं द्वारा नाम की समानता का फायदा उठाकर फर्जी वसूली, अवैध कुर्की और अदालतों में झूठे प्रकरण प्रस्तुत किए ।पीड़ितों ने बताया कि उन्होंने वर्षों पूर्व अक्षय सोसायटी मनासा से ऋण लिया था,जिसकी अदायगी वे पूर्ण रूप से कर चुके हैं। परंतु मनासा संस्था द्वारा लिए गए कोरे चेक का दुरुपयोग मंदसौर स्थित अक्षय सोसायटी द्वारा किया गया। इस संस्था के कर्मचारी – मनासा ब्रांच मैनेजर सूर्यप्रकाश मंडवारिया और नीमच ब्रांच के अमित बारोट ने इन चेकों के आधार पर चेक बाउंस के झूठे केस मंदसौर न्यायालय में दायर कर दिए। इससे भी गंभीर बात यह है कि उन्होंने सहकारिता अधिनियम की धारा 84-क के तहत मनासा के ऋण के नाम पर शोध्य प्रमाण पत्र प्राप्त कर 85-बी की कार्रवाई में तहसीलदार कार्यालय के माध्यम से बैंक खातों को सीज करवा दिया और कई खातों से राशि भी वसूल ली।पीड़ितों के अनुसार, वे लगातार प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने के लिए सहकारी संस्थाओं के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, पर कोई सुनवाई नहीं हो रही। अभय सोमानी, जो मंदसौर सोसायटी के CEO हैं, उन्होंने खुद माना है कि मनासा सोसायटी बीते 4 वर्षों से निष्क्रिय है। बावजूद इसके, मंदसौर संस्था द्वारा अधिकार का दुरुपयोग कर झूठे दस्तावेजों के आधार पर कुर्की की कार्रवाई की जा रही है।इस अन्याय और प्रशासनिक निष्क्रियता के विरोध में पीड़ितजन सोमवार से नीमच कलेक्टर कार्यालय के समक्ष भूख हड़ताल पर बैठे हैं। अधिकारी मौके पर पहुंचे और समझाइश देने की कोशिश की, परंतु पीड़ितों ने न्याय मिलने तक अनशन समाप्त न करने का संकल्प लिया