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निजी स्कूलों की मनमानी पर लगे रोक, एनसीईआरटी/एससीईआरटी की किताबें ही हों अनिवार्य : पालक संघ जिलाध्यक्ष जगदीश शर्मा

डेस्क न्यूज़ 15 July, 2026 अन्य

नीमच। शासन द्वारा शिक्षा के क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। "पढ़ेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया" जैसे प्रेरक संदेशों के माध्यम से बच्चों को शिक्षा के प्रति आकर्षित किया जा रहा है। वहीं निर्धन एवं पात्र विद्यार्थियों को स्कूल फीस में छूट, छात्रवृत्ति, मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहन तथा मध्यान्ह भोजन जैसी विभिन्न योजनाओं का लाभ भी दिया जा रहा है, ताकि बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि एवं मनोबल बढ़े।

इसके बावजूद कई निजी विद्यालय शासन की मंशा और शिक्षा व्यवस्था को दरकिनार कर अपनी मनमानी चला रहे हैं। नगर सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों में निजी स्कूलों द्वारा विद्यार्थियों की पाठ्यपुस्तकें, यूनिफॉर्म तथा अन्य शैक्षणिक सामग्री केवल एक विशेष चयनित दुकान से ही खरीदने के लिए अभिभावकों पर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से दबाव बनाए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इन दुकानों पर सामग्री मनमाने और अधिक दामों पर उपलब्ध कराई जाती है, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।

पालक खुलकर इस मुद्दे को नहीं उठा पा रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपने बच्चों के भविष्य की चिंता रहती है। उन्हें आशंका रहती है कि विरोध करने पर कहीं उनके बच्चों के साथ विद्यालय में भेदभाव न किया जाए या उन्हें स्कूल से निकालने जैसी स्थिति उत्पन्न न हो जाए।

उल्लेखनीय है कि शिक्षा की नगरी रामपुरा से प्रदेश की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने शिक्षा प्राप्त कर विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश का नाम रोशन किया है। ऐसे में आवश्यक है कि शासन एवं प्रशासन निजी विद्यालयों की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच कर नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करे, ताकि अभिभावक बिना अनावश्यक आर्थिक बोझ के अपने बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिला सकें। यह स्थिति केवल रामपुरा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के अनेक निजी विद्यालयों में देखने को मिल रही है।

पालक संघ की मांग है कि निजी विद्यालयों में भी मध्य प्रदेश बोर्ड द्वारा निर्धारित एनसीईआरटी/एससीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों को ही मान्यता दी जाए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर एवं मध्यमवर्गीय परिवारों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े। निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकों के स्थान पर शासन द्वारा निर्धारित पुस्तकों का उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

मध्य प्रदेश निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन) नियम, 2020 के उपनियम 6(घ) में स्पष्ट प्रावधान है कि निजी विद्यालय प्रबंधन किसी भी छात्र या अभिभावक को पुस्तकें, यूनिफॉर्म, टाई, जूते, कॉपी अथवा अन्य शैक्षणिक सामग्री केवल चयनित विक्रेता से खरीदने के लिए औपचारिक अथवा अनौपचारिक रूप से बाध्य नहीं करेगा। छात्र एवं अभिभावक इन सामग्रियों को खुले बाजार से अपनी सुविधा अनुसार खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं।

इसके बावजूद जिले में इस नियम का प्रभावी पालन नहीं होने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। पालक संघ ने प्रशासन से मांग की है कि जिले के सभी निजी विद्यालयों की जांच कराई जाए तथा मध्य प्रदेश बोर्ड द्वारा निर्धारित एनसीईआरटी/एससीईआरटी की पुस्तकों को ही लागू कराया जाए। साथ ही निजी प्रकाशकों की अनावश्यक महंगी पुस्तकों के संबंध में भी नियमानुसार कार्रवाई की जाए। यदि जांच में किसी विद्यालय प्रबंधन अथवा पुस्तक विक्रेता द्वारा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।

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