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एक्सक्लूसिव न्यूज़: नीमच के सरकारी स्कूल से रिलायंस रिटेल के बोर्डरूम तक; "बिजनेस टुडे" में देश के टॉप विज़नरी लीडर्स की सूची में चमके दीपक जैन

पंकज मलिक 14 July, 2026 बिजनेस


नीमच (पंकज मलिक) 14 जुलाई 2026। छोटे शहरों और गांवों के युवाओं के लिए यह कहानी किसी बड़े सपने के सच होने और हौसलों को उड़ान देने वाली है। राजस्थान के छोटे से गांव सुबी और नीमच के एक सरकारी स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने वाले दीपक जैन ने अपनी असाधारण प्रतिभा, अटूट मेहनत और दूरदर्शी नेतृत्व के दम पर कॉर्पोरेट जगत में राष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसी बुलंद पहचान बनाई है, जिस पर पूरे मालवा अंचल को गर्व है। देश की सबसे प्रतिष्ठित और विश्वसनीय बिजनेस मैगज़ीन "बिजनेस टुडे" ने उन्हें "टॉप विज़नरी लीडर्स ड्राइविंग इंडियाज़ ग्रोथ" की विशेष सूची में शामिल कर सम्मानित किया है।

यह उपलब्धि इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि इस सूची में दीपक जैन का नाम विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष अजय बंगा, अदार पूनावाला और टीवीएस मोटर्स के वेणु श्रीनिवासन जैसे देश-दुनिया के दिग्गज उद्योगपतियों के साथ शुमार किया गया है। यह सम्मान उन चुनिंदा नेतृत्वकर्ताओं को दिया जाता है जो अपने नवाचार और प्रभावी फैसलों से भारत की आर्थिक तरक्की को नई दिशा दे रहे हैं।

नीमच के सरकारी स्कूल की टाट-पट्टी से शुरू हुआ सपनों का सफर
दीपक जैन का बचपन राजस्थान के सुबी गांव में बीता, जबकि उनकी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा और मिडिल स्कूल की पढ़ाई नीमच के ही एक सरकारी स्कूल में हुई। नीमच की गलियों और कक्षाओं में बड़े सपनों का ताना-बाना बुनने वाले दीपक ने इसके बाद अपने भाई की प्रेरणा से बीकॉम किया और फिर चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) की पढ़ाई के लिए मायानगरी मुंबई का रुख किया। देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान आईआईएम बेंगलुरु (IIM Bengaluru) के पूर्व छात्र रहते हुए सीमित संसाधनों और ग्रामीण पृष्ठभूमि के बावजूद दीपक ने लगातार सीखने, कड़ी मेहनत करने और अपने काम के प्रति शत-प्रतिशत समर्पित रहने के सिद्धांत को कभी नहीं छोड़ा।

रिलायंस रिटेल समूह में 'अमांते' के सीईओ का गौरवमयी सफर
अपनी कॉर्पोरेट यात्रा को साझा करते हुए दीपक जैन ने बताया कि मुंबई जाने के बाद उन्हें सबसे पहले 'शा वॉलेस' कंपनी में नौकरी मिली। इसके बाद उन्होंने 'यूबी ग्रुप' (UB Group) ज्वाइन किया। साल 2014 में वे 'अमांते' (amanté) प्रीमियम लॉन्जरी एवं लाइफस्टाइल ब्रांड से जुड़े, जहां उन्हें मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) के पद पर काम करने का मौका मिला।

2021 में करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट
दीपक के करियर में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट तब आया जब साल 2021 में देश के सबसे बड़े रिटेल समूह रिलायंस रिटेल ने अमांते ब्रांड का अधिग्रहण किया । दीपक की असाधारण व्यावसायिक सूझबूझ को देखते हुए रिलायंस समूह ने उन्हें इस ब्रांड का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त कर दिया। उनके कुशल नेतृत्व में आज यह ब्रांड देश भर में नवाचार और मजबूत व्यावसायिक रणनीतियों के साथ नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

सफलता का मूलमंत्र: "टीम पर भरोसा और जमीन से जुड़ाव"
दीपक जैन अपने जीवन का आदर्श अपने पिता विमल जी जैन, माता स्वर्गीय पुखराज बाई जी और अपने बड़े भाई को मानते हैं, जिन्होंने हर कदम पर उन्हें प्रेरित किया। इसके साथ ही वे अपनी धर्मपत्नी श्वेता जैन के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित करते हैं। दीपक भावुक होकर कहते हैं कि जीवन के हर उतार-चढ़ाव में श्वेता का खास योगदान रहा है; उनके अटूट साथ के बिना यह लंबा और कड़ा सफर तय कर पाना नामुमकिन था।

अपनी लीडरशिप शैली और सफलता के मूलमंत्र पर बात करते हुए दीपक जैन ने देश के युवाओं के लिए एक बेहद सुंदर संदेश दिया:
"काम के प्रति लगन और शत-प्रतिशत ईमानदारी ही आपको आगे बढ़ा सकती है। जमीन से जुड़े रहना और सादगी बनाए रखना सफलता की पहली शर्त है। एक लीडर के रूप में मैंने हमेशा अपनी टीम पर पूरा भरोसा किया और उन्हें फैसले लेने की पूरी आजादी दी। आपकी लीडरशिप तभी मजबूत होगी जब आप अपनी टीम को आगे बढ़ने का मौका देंगे। यदि टीम पर भरोसा मजबूत है, तो परिणाम हमेशा बेहतर ही मिलेंगे।" 
बेटे की कामयाबी पर गर्व जताते हुए विमल जी जैन ने कहा:
"यह सब चारभुजा नाथ भगवान की असीम कृपा और आशीर्वाद का प्रतिफल है। हमारा बेटा दीपक एक बहुत छोटे से गांव 'सुबी' से निकलकर इस मुकाम पर पहुंचा है, जिसकी कुल आबादी महज 1000 लोगों की है। उसने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के ही व्यास बाल मंदिर से की थी। इसके बाद वह नीमच आया और यहाँ के मिडिल व सरकारी स्कूल से शिक्षा ग्रहण कर आगे बढ़ा।"

सीमित आवश्यकताओं में मुंबई भेजकर कराई पढ़ाई
अपने पुराने दिनों के संघर्ष को याद करते हुए उन्होंने बताया:
"नीमच में रहते हुए मैंने करीब 30 से 35 वर्षों तक किराना का व्यवसाय किया। जब दीपक को आगे पढ़ाना था, तब अपनी दैनिक आवश्यकताओं और खर्चों को बेहद सीमित कर लिया, ताकि उसकी पढ़ाई में कोई कमी न आए। इसी तरह हमने उसे चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) की पढ़ाई के लिए मुंबई भेजा। दीपक ने भी परिवार की परिस्थितियों और हमारे इस समर्पण व त्याग की कीमत को समझा। उसने मुंबई जैसे बड़े शहर में जी-तोड़ संघर्ष जारी रखा और कभी हार नहीं मानी। आज वह जिस सर्वोच्च मुकाम पर खड़ा है, उस पर मुझे, उसके भाइयों और हमारे पूरे परिवार को अत्यंत गर्व है।"

मालवा अंचल के युवाओं के लिए बने प्रेरणापुंज
दीपक जैन की इस राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धि से नीमच, सुबी और पूरे मालवा क्षेत्र में हर्ष का माहौल है। आज जब वे देश के सर्वोच्च कॉर्पोरेट मंच पर चमक रहे हैं, तब भी उनकी सादगी और संस्कार उनके करीबियों को प्रभावित करते हैं। वे अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय नीमच की माटी, वहां से मिली शिक्षा और परिवार से मिले अनुशासित संस्कारों को देते हैं। दीपक जैन का यह सफर इस बात का जीवंत और सबसे बड़ा उदाहरण है कि सपनों की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती, उन्हें हकीकत में बदलने के लिए बस एक जुनूनी दिल, धैर्य और निरंतर प्रयासों की जरूरत होती है।

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