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दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा के केस से तंग आकर युवक ने ससुराल में खोली चाय की दुकान '498A'

आत्महत्या का विचार त्याग 498A के दुरुपयोग पर अनूठा विरोध प्रदर्शन

डेस्क न्यूज 11 June, 2025

दुकान के मुहूर्त पर हथकड़ी पहनकर बनाई चाय

नीमच/अंता। अपने ऊपर लगे आरोपों को झूँठा बताते हुए मप्र के नीमच जिले के एक विवाहित युवा ने अपनी पत्नी द्वारा लगाए गए घरेलू हिंसा और दहेज प्रताड़ना के केस से तंग आकर धारा 498a के दुरुपयोग के प्रति विरोध प्रदर्शन करते हुए अपनी चाय की दुकान का नाम ही 498a रख दिया है। अपने टपरी बिज़नेस को उसने स्लोगन दिया है “जब तक नही मिलता न्याय, तब तक उबलती रहेगी चाय”

आत्महत्या का विचार त्याग सामना करने का किया फैसला  

पत्नी के आरोपों और IPC की धारा 498a के मामले से मप्र के नीमच जिले के अठाना निवासी कृष्ण कुमार धाकड़ (केके) इतने आहत हो गए की अपने जीवन को खत्म करने के बारे में भी सोचा। उसने अपनी पत्नी के लिए मन में प्यार, समर्पण और उसके लिए अपने दायित्वों के निर्वहन को भी कई बार सोशल मीडिया पर साझा किया। यही नहीं अपनी परेशानियों और प्रताड़ना को बयां करते हुए आत्महत्या कर लेने की बात भी सोशल मीडिया में अपने मित्रों से कई बार जाहीर की। कई मित्रों ने उन्हे समझाया और हालातों का सामना करने की सलाह दी। लगभग 03 वर्षों की घोर निराशा, परिवार की माली हालत और जटिल न्यायालयीन प्रक्रिया से दो चार होते हुए मित्रों से मिले संबल और अपनी इच्छाशक्ति से आखिरकार केके ने इस बुरे दौर का सकारात्मक रूप से सामना करने का संकल्प लिया।

अपने ससुराल जाकर खोल दी चाय की दुकान, नाम रखा 498A    

आत्महत्या का इरादा छोड़ केके ने IPC की धारा 498a के दुरुपयोग के प्रति विरोध प्रदर्शन करने का रचनात्मक तरीका निकाला और अठाना से 220 किलोमीटर दूर अपनी पत्नी के गाँव यानी अपने ससुराल में ही चाय की दुकान खोल दी। अपनी इस दुकान का नाम केके ने ‘498A टी कैफे’ रखा है। वे अपनी चाय की मार्केटिंग “स्पेशल टी बाय 498 वाले बाबा” लिखा होर्डिंग लगा कर कर रहे हैं। यही नहीं, धारा 498 A के दुरुपयोग के प्रति अपनी आवाज बुलंद करने के लिए उन्होंने बाकायदा एक स्लोगन बनाया है की “जब तक नहीं मिलता न्याय, उबलती रहेगी चाय”।

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया था पति-पत्नी के व्यापार का शुभारंभ 

अपनी पत्नी द्वारा लगाए गए केस और आरोपों को झुंठा करार देते हुए केके बताते हैं की 2018 में उनका विवाह राजस्थान के अंता निवासी महिला से हुआ था। दोनों ने मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण लिया। अठाना में ही मधुमक्खी पालन बिज़नेस चालू किया। कारोबार बढ़ा तो कई अन्य बेरोजगार महिलाओ को भी केके धाकड़ और उनकी पत्नि ने महिला सशक्तिकरण की भावना से रोजगार देना आरंभ किया। 8 अप्रेल 2021 को पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने मध्यप्रदेश में पहली बार महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने वाले इस कार्य की सराहना करते हुए केके धाकड़ द्वारा संचालित किए जा रहे मधुमक्खी पालन के कारोबार का शुभारंभ किया। करीब 1 वर्ष में मधुमक्खी पालन ओर शहद के व्यापार ने रफ्तार पकड़ी तो दुर—दुर तक इन पति-पत्नी के शहद की अच्छी खासी डिमांड हो गई।

अचानक वर्ष 2022 के अक्टूबर माह में केके धाकड़ की पत्नि रूठकर अपने पीहर अंता चली गई और फिर वापस नहीं आई। कुछ माह बाद केके की पत्नि ने घरेलू हिंसा और देहज प्रताड़ना को लेकर आईपीसी की धारा 498A और हर्जा- खर्चा के लिए धारा 125 के तहत न्यायालय में प्रकरण दर्ज करवा दिया। केके बताते हैं की "हमेशा अपनी पत्नी को आगे रखा। हमेशा उसे अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए प्रोत्साहित किया। जब बिज़नेस किया तो फर्म सहित हर रजिस्ट्रेशन और प्रक्रिया उसी के नाम से सम्पन्न करवाई। आज इन्ही सब चीजों का फायदा उठाते हुए उसने मेरा सब कुछ छिन लिया। केके याने कृष्ण कुमार धाकड़ बताते हैं की एक गाड़ी के दो पहियों की तरह हमारी गृहस्थी की गाड़ी को हम अच्छे से खींच रहे थे। साथ ही केके यूपीएससी की तैयारी भी कर रहे थे जो अवसाद और परेशानियों में पत्नी के केस लगाने के बाद छूट गई"।

अनूठे अंदाज में आवाज उठाई 

ऐसे में केके धाकड़ ने प्रताड़ित हो कर यह अनूठा कदम उठाते हुए अपने ससुराल क्षेत्र बाराँ जिले के अंता में ही ‘498ए वाले बाबा’ के नाम से एक चाय की टपरी लगा ली। केके धाकड़ ने अपनी प्रताड़ना को जगजाहिर करने और पत्नी पीड़ित पतियों की व्यथा को प्रदर्शित करने के लिए दुकान पर वरमाला और एक दुल्हे का सेहरा भी सजा रखा है। साथ ही दुकान के मुहूर्त में केके ने हाथो में हथकड़ी पहनकर चाय बनाई। इस तरह अलग ही अंदाज में धारा 498 A के दुरुपयोग के प्रति आवाज उठा रहे हैं केके ।

बूढ़ी माँ के लिए त्यागा आत्महत्या का विचार    

केके धाकड़ कहते हैं की 498A की वजह से कई महिलाएं, पुरूषो को डरा—धमका कर रखती हैं और कानून का सहारा लेकर उन्हे झुठे केसो में फंसा भी देती है। ऐसा ही मामला मेरे साथ हुआ है। पिछले 3 वर्षो से झुठे प्रकरण में फंसकर राजस्थान के अंता जिले में न्याय के लिए दर—दर भटक रहा हूँ। मेरी एक बूढ़ी माँ है जिसका एक मात्र मैं ही सहारा हूँ। सब कुछ बर्बाद होने के बाद टीन शेड में जीवन व्यतीत करना पड़ रहा है। मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना झेलने को मजबूर हूँ। कई बार सोचा कि आत्महत्या कर लूँ फिर बूढ़ी माँ का ख्याल आया। जिसका मात्र एक मैं ही सहारा हूँ। पत्नि द्वारा लगाए गए 498ए के झुठे प्रकरण के बाद धारा 125 का दोहरा भार है। इसलिए फैसला लिया है कि जहां कानून का दुरूपयोग कर मुझे फंसाने की साजिश रची गई है उसी जगह ‘498ए टी कैफे' के नाम से चाय बेचकर कानून के साथ निष्पक्ष लड़ाई लड़ता रहुंगा और इसलिए यह स्लोगन लिखा है कि 'जब तक नही मिलता न्याय, तब तक उबलती रहेगी चाय'। 

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