डेस्क न्यूज़
05 July, 2026
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नीमच। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी), नई दिल्ली द्वारा कलाव्योम फाउंडेशन एवं रंगाभास नाट्यशाला के सहयोग से इंदिरा नगर स्थित फ्यूचर प्राइड स्कूल परिसर में आयोजित 30 दिवसीय बाल रंगमंच एवं अभिनय कार्यशाला में बच्चों की अभिनय प्रतिभा को नई दिशा दी जा रही है। 25 जून से शुरू हुई इस नि:शुल्क कार्यशाला में जिले के विभिन्न विद्यालयों के 40 प्रतिभागी प्रतिदिन शाम 3 से 7 बजे तक रंगमंच की बारीकियां सीख रहे हैं।
कार्यशाला का निर्देशन अभिनेता एवं रंगकर्मी सुशील कांत मिश्रा कर रहे हैं, जबकि सावित्री मिश्रा बच्चों को वॉइस एंड स्पीच, स्टोरी टेलिंग, एकाग्रता, अवलोकन क्षमता और लय (रिद्म) का प्रशिक्षण दे रही हैं। खेल आधारित गतिविधियों और व्यावहारिक अभ्यासों के माध्यम से प्रतिभागियों को अभिनय, मंच अनुशासन और रंगमंच के तकनीकी पहलुओं से परिचित कराया जा रहा है।
कार्यशाला समन्वयक अपर्णा भोसले ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि रंगमंच केवल अभिनय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तित्व विकास, संवाद कौशल, संवेदनशीलता, अनुशासन और रचनात्मक सोच विकसित करने का प्रभावी माध्यम भी है। उन्होंने बच्चों को जीवन के हर क्षेत्र में आत्मविश्वास और प्रभावी अभिव्यक्ति विकसित करने के लिए रंगमंच से जुड़े रहने की प्रेरणा दी।
अभिनय में अपना 'मेथड' विकसित करना भी सीख रहे बच्चे
कार्यशाला में बच्चों को यह भी समझाया जा रहा है कि अभिनय केवल संवाद बोलने का नाम नहीं, बल्कि किसी भी चरित्र को आत्मसात करने की एक सृजनात्मक प्रक्रिया है। प्रशिक्षकों के अनुसार हर कलाकार की अपनी अलग कार्यशैली और अभिनय पद्धति होती है। इसलिए किसी एक तय "मेथड" को अपनाने के बजाय अपने अनुभव, संवेदनाओं और अभ्यास के आधार पर अभिनय शैली विकसित करना अधिक महत्वपूर्ण है।
प्रशिक्षकों ने बताया कि अभिनय में सफलता का पैमाना किसी विशेष पद्धति का अनुसरण नहीं, बल्कि दर्शकों तक प्रभावी ढंग से भावनाएं पहुंचाना है। इसी उद्देश्य से बच्चों को नर्वसनेस पर नियंत्रण, आत्मविश्वास, मंच संचालन, टीमवर्क और रचनात्मक सोच का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कार्यशाला का समापन 26 जुलाई को होगा। समापन समारोह में प्रतिभागी बच्चों द्वारा तैयार किए गए नाटक का मंचन किया जाएगा, जिसमें वे कार्यशाला के दौरान सीखी गई अभिनय कला, रचनात्मकता और मंचीय कौशल का प्रदर्शन करेंगे।