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सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: अदालती फैसलों में AI का गलत इस्तेमाल 'विनाशकारी', NCLT का आदेश रद्द

डेस्क न्यूज़ 04 July, 2026 अन्य

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अदालती कार्यवाही और न्यायिक फैसलों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के गलत और बिना सत्यापन वाले इस्तेमाल पर कड़ी नाराजगी जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि कानून और न्याय के क्षेत्र में एआई का ऐसा उपयोग "मिथाइल आइसोसाइनेट जैसे विषैले रसायन के रिसाव" की तरह है, जो अदृश्य होने के साथ-साथ बेहद घातक भी साबित हो सकता है।

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने गुरुवार को यह टिप्पणी करते हुए राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) का एक फैसला रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि एआई से तैयार किए गए संदर्भों या न्यायिक मिसालों का बिना सत्यापन अदालत में उल्लेख करना या उन पर भरोसा करना स्वीकार्य नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी अधिवक्ता द्वारा सत्यापन के बिना एआई से तैयार संदर्भों को अदालत में प्रस्तुत करना पेशेवर कदाचार की श्रेणी में आता है। साथ ही अदालतों को भी ऐसे संदर्भों का उल्लेख करने या उनका उपयोग करने से बचना चाहिए।

हालांकि, शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका यह फैसला एआई तकनीक के उचित और जिम्मेदार उपयोग के खिलाफ नहीं है। यदि एआई का उपयोग तथ्यों और कानूनी संदर्भों के उचित सत्यापन के साथ किया जाता है, तो उस पर कोई रोक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी न्यायिक प्रक्रिया में एआई के उपयोग को लेकर भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश मानी जा रही है।

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