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निर्जला एकादशी पर आस्था का सैलाब : नीमच के मंदिरों में उमड़े हजारों श्रद्धालु, 1500 किलो आमरस का महाभोग चढ़ाया

डेस्क न्यूज़ 26 June, 2026 अन्य

नीमच। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी (आम ग्यारस) पर गुरुवार को पूरे नीमच जिले में श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। सुबह से ही शहर के प्रमुख मंदिरों में भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। दिनभर पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन, धार्मिक प्रवचन, आरती और प्रसादी वितरण के कार्यक्रम आयोजित किए गए। बड़ी संख्या में महिलाओं और पुरुषों ने निर्जला व्रत रखकर भगवान विष्णु की आराधना की तथा परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य और मंगलमय जीवन की कामना की।

शहर के प्रसिद्ध श्री सांवरिया सेठ मंदिर में निर्जला एकादशी के अवसर पर विशेष धार्मिक आयोजन हुए। मंदिर को आकर्षक फूलों और रंग-बिरंगी सजावट से भव्य रूप दिया गया। भगवान श्रीकृष्ण का मनमोहक श्रृंगार किया गया, जिसे देखने के लिए दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मंदिर के मुख्य पुजारी एवं भागवताचार्य पंडित राजेंद्र पुरोहित ने श्रद्धालुओं को निर्जला एकादशी की महिमा बताते हुए व्रत कथा का वाचन किया। उन्होंने कहा कि वर्षभर की सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी को सर्वोत्तम माना गया है और इसका विधिपूर्वक पालन करने से सभी एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं को आमरस का प्रसाद भी वितरित किया गया।

इसी तरह सराफा बाजार स्थित श्री बिचला गोपालजी मंदिर में भी दिनभर पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और दर्शन का क्रम चलता रहा। मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंजता रहा, जहां श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

वहीं, नीमच नरेश के दरबार में निर्जला एकादशी का पर्व विशेष उत्साह और भव्यता के साथ मनाया गया। भगवान को करीब 1500 किलो आमरस का महाभोग अर्पित किया गया। प्रातःकालीन आरती, संध्या महाआरती और ताली कीर्तन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। बाबा का शाही श्रृंगार दिल्ली और कोलकाता से मंगाए गए विशेष पुष्पों से किया गया, जिसने मंदिर की भव्यता को और भी आकर्षक बना दिया। महाभोग के बाद भक्तों के बीच आमरस का प्रसाद वितरित किया गया।

प्राचीन श्री श्याम मंदिर (बावड़ी वाले बालाजी) में भी दिनभर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। मंदिर दर्शनार्थ सुबह से देर शाम तक खुला रहा, जहां भक्तों ने भगवान के दर्शन कर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया और पुण्य लाभ अर्जित किया।

पौराणिक महत्व

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार निर्जला एकादशी का उल्लेख महाभारत और पद्म पुराण में मिलता है। मान्यता है कि पांडवों में भीमसेन भोजन के बिना नहीं रह सकते थे। उन्होंने महर्षि व्यास से ऐसा व्रत बताने का आग्रह किया जिससे वर्षभर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त हो सके। तब महर्षि व्यास ने उन्हें ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी पर निर्जल रहकर भगवान विष्णु की उपासना करने का उपदेश दिया। तभी से यह व्रत भीमसेनी एकादशी के नाम से भी प्रसिद्ध हुआ। मान्यता है कि इस दिन अन्न और जल का त्याग कर श्रद्धापूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करने से समस्त पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

नीमच में निर्जला एकादशी का पर्व इस वर्ष भी पूरे धार्मिक उत्साह, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। जिलेभर के मंदिरों में हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन कर पुण्य लाभ अर्जित किया और धर्ममय वातावरण में भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।

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