डेस्क न्यूज़
23 June, 2026
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भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश को मछली उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अगले ढाई वर्षों में ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए कि प्रदेश को मछली बीज के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर न रहना पड़े। मुख्यमंत्री रविवार को भोपाल में मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।
बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार की एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026 के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। इसके तहत प्रदेश में मछली पालन के क्षेत्र में 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आ रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में प्राप्त 2 लाख 91 हजार 938 केज प्रस्तावों के लिए कार्यादेश भी जारी किए जा चुके हैं, जिससे मत्स्य उत्पादन और रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मछली उत्पादन के साथ-साथ प्रदेश में मोती उत्पादन को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इसके लिए अन्य राज्यों में चल रही सफल योजनाओं और सर्वोत्तम व्यवस्थाओं का अध्ययन कर उन्हें मध्यप्रदेश में लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए मत्स्य क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में कम से कम एक हैचरी (मछली बीज उत्पादन केंद्र) विकसित की जाए। उन्होंने कहा कि जिलों में मछली बीज की उपलब्धता बढ़ने से स्थानीय स्तर पर मत्स्य पालन को बढ़ावा मिलेगा और उत्पादन में भी तेजी आएगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मछली बीज की पर्याप्त उपलब्धता आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
बैठक में मुख्यमंत्री ने बढ़ते मछली उत्पादन को देखते हुए कोल्ड चेन, भंडारण, परिवहन और अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के विकास पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मछली उत्पादों की ब्रांडिंग और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक नेटवर्किंग विकसित की जानी चाहिए, ताकि प्रदेश के मत्स्य उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच सकें।
मुख्यमंत्री ने नदियों के पुनर्जीवन, जलीय जीवों के संरक्षण और जल आधारित पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि जल संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ जल पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा देने की कार्ययोजना तैयार की जाए, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिल सकें।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि मछुआ किसान क्रेडिट कार्ड योजना के अंतर्गत अंतर्देशीय जल क्षेत्र में मध्यप्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। यह उपलब्धि प्रदेश में मत्स्य पालन के प्रति बढ़ती जागरूकता और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाती है।
इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर पर अंतर्देशीय मत्स्य पालन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश के सिवनी जिले को वर्ष 2023-24 के लिए प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है, जो राज्य के मत्स्य विकास क्षेत्र में बढ़ती उपलब्धियों का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार मत्स्य पालन को किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का महत्वपूर्ण माध्यम मानती है। आधुनिक तकनीक, निवेश और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से मध्यप्रदेश आने वाले वर्षों में देश के अग्रणी मत्स्य उत्पादक राज्यों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।