डेस्क न्यूज़
13 June, 2026
बड़ा फर्जीवाड़ा: जयपुर के अवैध कारखाने में बसें अभी निर्माणाधीन थीं, लेकिन मध्य प्रदेश के नीमच परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बिना गाड़ी देखे ही कागजों पर पक्का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया।
विशेष रिपोर्ट | द वॉचमैन पोस्ट नीमच/जयपुर, 13 जून 2026।
मध्य प्रदेश के नीमच क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय में चल रहे एक बड़े 'कागजी पासिंग' सिंडिकेट का सनसनीखेज भंडाफोड़ हुआ है। राजस्थान के जयपुर में जिन बसों की बॉडी (ढांचा) अभी एक अवैध कारखाने में निर्माणाधीन है, नीमच परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बिना वाहनों को देखे और बिना किसी भौतिक सत्यापन के, करीब 15 दिन पहले ही उनका पक्का रजिस्ट्रेशन और फिटनेस प्रमाणन जारी कर दिया।
इस अंतर्राज्यीय फर्जीवाड़े को गंभीरता से लेते हुए जयपुर के प्रादेशिक परिवहन अधिकारी राजेंद्र सिंह शेखावत के कड़े निर्देशों पर परिवहन निरीक्षक रामसिंह मीणा द्वारा जयपुर के गलता गेट थाने में एफआईआर दर्ज करवाई गई है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद मध्य प्रदेश और राजस्थान के परिवहन महकमे में हड़कंप मच गया है।
उड़नदस्ते के छापे में खुली नीमच आरटीओ की पोल
जयपुर RTO प्रथम की उड़नदस्ता टीम को दिल्ली रोड स्थित 'खोले के हनुमान जी' के पास एक कारखाने में बिना किसी नियम-कायदे के बसों के निर्माण की गुप्त सूचना मिली थी। परिवहन निरीक्षक महेश पारीक ने जब M/S MS Body Repair नामक कारखाने पर औचक छापा मारा, तो वहां दो बसें निर्माणाधीन अवस्था में पाई गईं।
जब टीम ने उनके चेसिस नंबरों को ऑनलाइन परिवहन पोर्टल पर खंगाला, तो चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि इन बसों का रजिस्ट्रेशन 15 दिन पहले ही नीमच (MP) में किया जा चुका था।
BNS की इन 7 गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
परिवहन निरीक्षक रामसिंह मीणा द्वारा कारखाना संचालक मुबीन पुत्र यासीन (निवासी जयपुर) और वाहन स्वामी अभिमन्यु चौधरी पुत्र राज सिंह चौधरी (निवासी बापू नगर, जयपुर) सहित नीमच के मिलीभगत करने वाले पंजीयन अधिकारियों के विरुद्ध शिकायत की। शिकायत पर जयपुर पुलिस ने मुबिन और अभिमन्यु चौधरी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की इन 7 गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज कर लिया है-
शासकीय कर्मचारी होने से नीमच आरटीओ स्टाफ पर पुलिस करेगी जांच
FIR में गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत की गई कि नीमच RTO द्वारा जयपुर में निर्माणाधीन बस वाहन का बिना भौतिक सत्यापन किये ही कूटरचित एवं छद्म दस्तावेजों के आधार पर मोटर वाहन अधिनियम, 1988 एवं तत्समत् विरचित विनियमों एवं सड़क सुरक्षा संबंधी आवश्यक न्यूनतम प्रावधानों का उल्लघंन कर पंजीयन कर दिया गया। जो पद का दुरूपयोग कर किसी को अनुचित लाभ प्रदान करने की श्रेणी में आता है। परिवहन नियमों के अनुसार, चेसिस के रूप में खरीदे गए किसी भी वाहन का पंजीयन करने से पहले परिवहन अधिकारी या मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर द्वारा उसका भौतिक निरीक्षण करना अनिवार्य है। ऐसे में जब बसें पिछले कई महीनों से जयपुर के गैराज में बन रही थीं, तो नीमच में उनका भौतिक सत्यापन कैसे हो गया? यह सीधे तौर पर पद के दुरुपयोग और अवैध लाभ पहुंचाने का मामला है।
जांच के बाद सरकारी अधिकारियों पर भी होगी कार्रवाई: आरटीओ शेखावत
जयपुर के परिवहन अधिकारी (RTO) राजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि, "वाहन स्वामी और अवैध बॉडी बिल्डर पर नामजद FIR हुई है । चूंकि इस पूरे फर्जीवाड़े और आपराधिक षड्यंत्र में नीमच (मध्य प्रदेश) के पंजीयन अधिकारी भी बराबर के भागीदार हैं, इसलिए शासकीय कर्मचारी होने के नाते उनके विरुद्ध कानूनी जांच करने जयपुर पुलिस को कहा गया है। पुलिस जांच में जिनके नाम और भूमिका पूरी तरह स्पष्ट होंगी, उन पर भी शिकंजा कसा जाएगा।"
पंजीयन निरस्त करने के लिए मध्य प्रदेश परिवहन विभाग को पत्र
इस बड़े खुलासे के बाद जयपुर परिवहन विभाग ने नीमच आरटीओ को इन दोनों नियमविरुद्ध पंजीकृत बसों का रजिस्ट्रेशन तत्काल प्रभाव से शून्य (निरस्त) करने के लिए पत्र लिखने की तैयारी कर ली है। साथ ही, मध्य प्रदेश परिवहन विभाग को भी इस पूरे रैकेट की आधिकारिक सूचना भेजी जा रही है। मामले की आगामी विवेचना गलता गेट थाने के उपनिरीक्षक ग्यारसी लाल सैनी को सौंपी गई है। डीटीओ नाथु सिंह ने इस पूरे मामले की विस्तृत जानकारी दी है।
बिना ट्रेड सर्टिफिकेट के बन रही थीं 'असुरक्षित' बसें
जांच में सामने आया कि आरोपी बॉडी बिल्डर मुबीन के पास बस निर्माण का न तो कोई वैध ट्रेड सर्टिफिकेट था, न बस बॉडी एक्रीडेशन प्रमाण पत्र और न ही केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के तहत अनिवार्य टाईप अप्रूवल था। सुरक्षा मानकों (AIS 052, AIS 153) की घोर अनदेखी कर अवैध रूप से 36 स्लीपर और वॉशरुम युक्त बसें बनाई जा रही थीं, जो सड़क सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं।
"गलत फोटो भेजे तो उन पर कार्रवाई हो, हमने जो किया सही किया": नीमच आरटीओ नंदलाल गामड़ की अजीब सफाई
इस पूरे अंतर्राज्यीय महाघोटाले और कागजी पासिंग को लेकर जब 'द वॉचमैन पोस्ट' ने नीमच के परिवहन अधिकारी (RTO) नंदलाल गामड़ से सवाल किए, तो उन्होंने एक चौंकाने वाला स्वीकारोक्ति बयान दिया। आरटीओ गामड़ ने साफ शब्दों में स्वीकार किया कि, "मोटर बॉडी निर्माता और वाहन मालिक ने जो फोटोग्राफ कार्यालय को भेजे थे, उसी आधार पर यह पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) किया गया था।"
जब 'द वॉचमैन पोस्ट' ने बताया बस का असली रंग, तो आरटीओ रह गए दंग
बातचीत के दौरान जब 'द वॉचमैन पोस्ट' ने आरटीओ नंदलाल गामड़ के सामने पुख्ता प्रशासनिक तथ्य रखे कि जयपुर के कारखाने में जप्त बस की बॉडी का वास्तविक रंग 'नीला' है, जबकि नीमच कार्यालय ने सरकारी दस्तावेजों (RC) में उसे 'काले रंग' की बस बताकर पास कर दिया है, तो यह सुनते ही आरटीओ खुद दंग रह गए। पहले तो उन्होंने इस बात से साफ इनकार करने की कोशिश की, लेकिन जब 'द वॉचमैन पोस्ट' द्वारा उनसे उन बसों के फोटो और वीडियो मांगे गए, जिसके आधार पर उन्होंने घर बैठे पासिंग कर दी, तो वे बगले झांकने लगे। उन्होंने असहज होते हुए कहा कि, "मुझे उन फोटोग्राफ्स को दोबारा देखना होगा।"
दोषियों पर कार्रवाई की बात कही, पर खुद को दी क्लीन चिट
अपने विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और स्वयं का बचाव करते हुए आरटीओ नंदलाल गामड़ ने आगे कहा कि, "मोटर बॉडी निर्माता और वाहन मालिक द्वारा यदि विभाग को गलत फोटो भेजकर गुमराह किया गया है, तो निश्चित रूप से उन पर कड़ी कार्रवाई होना ही चाहिए। लेकिन जहां तक हमारे विभाग की बात है, हमने जो भी प्रक्रिया अपनाई है और जो किया है, वह पूरी तरह सही किया है।"
आरटीओ गामड़ का यह बयान खुद उनके विभाग की कार्यप्रणाली पर कई बड़े सवाल खड़े करता है। नियमों के मुताबिक यात्री बसों का बिना 'भौतिक सत्यापन' किए पंजीयन और फिटनेस जारी करना कानूनन अपराध है, ऐसे में सिर्फ "मालिक के भेजे फोटो" के आधार पर आरसी जारी कर देना सीधे तौर पर पद के दुरुपयोग और गंभीर लापरवाही को प्रमाणित करता है।