डेस्क न्यूज़
13 June, 2026
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22 हॉटस्पॉट पर तैयार होंगे 'सड़क सुरक्षा मित्र', सीपीआर और प्राथमिक उपचार देकर बचाई जाएंगी जिंदगियां
नीमच। सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने और हादसे के बाद घायल व्यक्ति को समय पर जीवनरक्षक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नीमच पुलिस द्वारा शुरू किए गए "जीवन संजीवनी अभियान" के तहत शनिवार को जावद थाना क्षेत्र के दुर्घटना संभावित हॉटस्पॉट कानका फंटा पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक राजेश व्यास, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हेमलता अग्रवाल एवं एसडीओपी जावद रोहित राठौर के निर्देशन में आमजन को सीपीआर और प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिया गया।
जिले में लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली मौतों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक राजेश व्यास ने इस अभिनव अभियान की परिकल्पना की है। आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2023 में जिले में 359 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 101 लोगों की मौत हुई। वर्ष 2024 में 368 दुर्घटनाओं में 120 लोगों ने जान गंवाई, जबकि वर्ष 2025 में 321 सड़क हादसों में 117 लोगों की मौत दर्ज की गई। तीन वर्षों में 1048 सड़क दुर्घटनाओं में 338 लोगों की मौत ने पुलिस प्रशासन को चिंतित कर दिया।
इन्हीं आंकड़ों को देखते हुए पुलिस अधीक्षक राजेश व्यास ने नगर पुलिस अधीक्षक, एसडीओपी जावद एवं मनासा, यातायात पुलिस, ई-डीएआर तकनीकी टीम एवं डीएमआर संचालकों के साथ कई दौर की बैठकों में दुर्घटनाओं के कारणों का विश्लेषण कराया। तकनीकी एवं भौतिक सर्वेक्षण के बाद जिले के 22 ऐसे हॉटस्पॉट चिन्हित किए गए, जहां सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं होती हैं।
निरीक्षण में यह सामने आया कि दुर्घटना के बाद के शुरुआती कुछ मिनट यानी "गोल्डन ऑवर" में यदि घायल को सीपीआर और प्राथमिक उपचार मिल जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है। इसी सोच के साथ "जीवन संजीवनी अभियान" शुरू किया गया।
अभियान के तहत जिले के सभी 22 चिन्हित हॉटस्पॉट पर आसपास रहने वाले 50-50 लोगों को विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा सीपीआर और प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण प्राप्त लोग दुर्घटना की स्थिति में घायल व्यक्ति को तत्काल सहायता प्रदान कर सकेंगे और अस्पताल पहुंचने तक उसकी जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
कानका फंटा पर आयोजित कार्यक्रम में चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. विनोद खोर ने उपस्थित ग्रामीणों, युवाओं और स्वयंसेवकों को लाइव डेमो के माध्यम से सीपीआर देने की प्रक्रिया, दुर्घटना के बाद प्राथमिक उपचार, रक्तस्राव रोकने के उपाय और घायल को सुरक्षित तरीके से अस्पताल पहुंचाने के तरीके बताए। प्रशिक्षण में लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और स्वयं अभ्यास भी किया।
अभियान की एक विशेष पहल "सड़क सुरक्षा मित्र" योजना भी है। इसके तहत एक विशेष क्यूआर कोड जारी किया गया है। कोई भी व्यक्ति क्यूआर कोड स्कैन कर अभियान से जुड़ सकता है। दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने वाले लोगों का विवरण ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा और उन्हें "सड़क सुरक्षा मित्र" के रूप में पहचान दी जाएगी।
कार्यक्रम के दौरान थाना प्रभारी जावद मनोज जादौन, चौकी प्रभारी नयागांव मंगल सिंह राठौड़, यातायात थाना प्रभारी सुबेदार सोनू बड़गुजर, डीएमआर पुष्पेंद्र कारपेंटर सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, ग्रामीण और आमजन मौजूद रहे।
पुलिस अधीक्षक राजेश व्यास ने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि सड़क दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति की मदद करना मानवता का सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने नागरिकों से "जीवन संजीवनी अभियान" को सफल बनाने, सड़क सुरक्षा मित्र बनने और दुर्घटना पीड़ितों की मदद के लिए आगे आने का आह्वान किया।