डेस्क न्यूज़
09 June, 2026
नीमच। जावद जनपद पंचायत अध्यक्ष गोपाल चारण को भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के तहत पद से बर्खास्त करने की मांग को लेकर मंगलवार को जिला मुख्यालय पर एक अनोखा और तीखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। जावद विधानसभा क्षेत्र के नागरिक और कांग्रेस नेता पंकज तिवारी अपने मुंह पर "भ्रष्ट कुर्सी पर मौन क्यों?" लिखी पट्टी बांधकर नीमच कलेक्टोरेट पहुंचे। इस दौरान उनके हाथों में भारतीय संविधान और मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम-1993 की प्रतियां थीं, जिसके जरिए उन्होंने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
लोकायुक्त द्वारा रिश्वत लेते रेंज हाथों गिरफ्तारी बाद भी पद पर बने रहने का विरोध
कलेक्टर के नाम सौंपे गए ज्ञापन में पंकज तिवारी ने सीधे आरोप लगाया कि वर्ष 2023 में लोकायुक्त पुलिस ने जावद जनपद पंचायत अध्यक्ष गोपाल चारण को कथित रूप से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। उन्होंने कहा कि इस गंभीर मामले की जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया वर्तमान में भी गतिशील है, लेकिन इसके बावजूद संबंधित जनप्रतिनिधि को अब तक पद से पृथक नहीं किया गया है। तिवारी ने इसे जनहित, नैतिक मूल्यों और लोकतांत्रिक व्यवस्था के बिल्कुल विपरीत बताते हुए कहा कि इससे समाज में बेहद गलत संदेश जा रहा है।
प्रशासन की निष्पक्षता पर खड़े किये प्रश्नचिह्न
ज्ञापन में स्पष्ट तौर पर मांग की गई है कि भ्रष्टाचार के इतने गंभीर मामले और न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन होने के चलते, मध्य प्रदेश पंचायत राज अधिनियम के तहत वैधानिक कार्रवाई करते हुए अध्यक्ष को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त किया जाए। पंकज तिवारी ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि लंबे समय के बाद भी प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम न उठाना, उसकी अपनी निष्पक्षता और नीयत पर भी बड़े प्रश्नचिह्न खड़े करता है।
संवैधानिक जवाबदेही सर्वोपरि: यश लोहार
प्रदर्शन के दौरान उपस्थित यश लोहार ने भारतीय संविधान और पंचायत राज अधिनियम के कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी जनप्रतिनिधि की जवाबदेही सबसे ऊपर होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि भ्रष्टाचार के मामलों में त्वरित, निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई नहीं की गई, तो जनता का प्रशासनिक और लोकतांत्रिक संस्थाओं से विश्वास पूरी तरह उठ जाएगा।
इस अनोखे प्रदर्शन ने कलेक्टोरेट परिसर में मौजूद अधिकारियों और आम जनता का ध्यान अपनी ओर जमकर आकर्षित किया। अब देखना यह है कि इस तीखे विरोध और सौंपे गए ज्ञापन के बाद जिला प्रशासन इस मामले में क्या वैधानिक रुख अख्तियार करता है।