डेस्क न्यूज
11 June, 2026
प्रशासनिक
नीमच। रतलाम रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) निमीष अग्रवाल ने दो दिवसीय वार्षिक निरीक्षण के तहत 10 एवं 11 जून को नीमच जिले का दौरा कर पुलिस व्यवस्थाओं की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने पुलिस अधीक्षक कार्यालय, थाना नीमच कैंट, पुलिस लाइन एवं पुलिस कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया तथा जिले के सभी पुलिस अधिकारियों की बैठक लेकर कानून व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और सड़क सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए।
निरीक्षण के दूसरे दिन डीआईजी निमीष अग्रवाल ने पुलिस लाइन पहुंचकर परेड की सलामी ली और परेड का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने पुलिस लाइन की विभिन्न शाखाओं का अवलोकन कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की। निरीक्षण के उपरांत पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों का सैनिक सम्मेलन आयोजित किया गया।
सैनिक सम्मेलन में डीआईजी ने पुलिसकर्मियों से आत्मीय संवाद करते हुए उनके कार्य अनुभव, चुनौतियों और विभागीय आवश्यकताओं पर चर्चा की। उन्होंने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की व्यक्तिगत, पारिवारिक एवं सेवा संबंधी समस्याएं भी सुनीं तथा उनके निराकरण के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और आश्वासन दिया। सम्मेलन के दौरान पुलिस बल के मनोबल, अनुशासन और कार्यकुशलता पर भी विशेष जोर दिया गया।
पुलिस अधीक्षक राजेश व्यास ने डीआईजी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे सम्मेलन पुलिसकर्मियों को अपनी समस्याएं सीधे वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने का अवसर प्रदान करते हैं और इससे पुलिस बल का मनोबल भी बढ़ता है।
पुलिस लाइन निरीक्षण के बाद डीआईजी ने पुलिस कंट्रोल रूम में जिले के सभी राजपत्रित अधिकारियों, थाना प्रभारियों एवं शाखा प्रभारियों की बैठक ली। बैठक में जिले के विभिन्न थानों में दर्ज अपराधों, लंबित मामलों और अपराध नियंत्रण संबंधी गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में डीआईजी ने सड़क दुर्घटनाओं को रोकने को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए सभी थाना प्रभारियों और राजपत्रित अधिकारियों को दुर्घटना संभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर ब्लैक स्पॉट चिन्हित करने तथा संबंधित विभागों से समन्वय कर आवश्यक सुधारात्मक उपाय करने के निर्देश दिए। उन्होंने ब्लैक स्पॉट पर नियमित वाहन चेकिंग और हिट एंड रन मामलों में पीड़ितों को सहायता राशि दिलाने की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
ग्रामीण क्षेत्रों में अपराध नियंत्रण के लिए ग्राम पंचायतों और जनसहयोग से गांवों एवं संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही पेट्रोल पंपों और धार्मिक स्थलों के आसपास भी निगरानी व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया गया।
डीआईजी ने शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ अभियान चलाने, लंबित माल का शीघ्र निराकरण करने और गंभीर अपराधों की विवेचना स्वयं थाना प्रभारी स्तर पर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हत्या, हत्या के प्रयास एवं अन्य गंभीर मामलों में फरार आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए।
बैठक में मादक पदार्थों की तस्करी को लेकर भी सख्त रुख अपनाया गया। डीआईजी ने एनडीपीएस एक्ट के तहत अधिकतम कार्रवाई करने, तस्करों के खिलाफ पीट एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा जमानत निरस्तीकरण की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नशा तस्करी के खिलाफ लगातार और प्रभावी अभियान चलाया जाना चाहिए।
इसके अलावा गुण्डों के विरुद्ध बाउंड ओवर कार्रवाई, गौवंश संरक्षण अधिनियम, कोलाहल अधिनियम के तहत कार्रवाई तथा संपत्ति संबंधी अपराधों में बरामदगी और पतारसी बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए। महिला अपराधों को लेकर उन्होंने थाना प्रभारियों को महिला अपराध हॉटस्पॉट चिन्हित कर जागरूकता अभियान चलाने और प्रभावी रोकथाम के प्रयास करने को कहा।
बैठक में पुलिस अधीक्षक राजेश व्यास, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हेमलता अग्रवाल, नगर पुलिस अधीक्षक किरण चौहान, मनासा प्रभारी एसडीओपी निकिता सिंह, जावद एसडीओपी रोहित राठौर सहित जिले के सभी थाना प्रभारी, चौकी प्रभारी एवं शाखा प्रभारी उपस्थित रहे।
डीआईजी के वार्षिक निरीक्षण को जिले की पुलिस व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों से सड़क सुरक्षा, अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा और नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई को नई गति मिलने की उम्मीद है।