डेस्क न्यूज़
11 June, 2026
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मात्र 2 वर्ष की कड़ी मेहनत से हासिल की राष्ट्रीय सफलता; मेंटर्स, मोटिवेटर्स और कोचों की टीम ने तराशी प्रतिभा
नीमच। प्रतिभा, दृढ़ संकल्प और अथक परिश्रम का अनूठा उदाहरण पेश करते हुए नीमच की होनहार खिलाड़ी अस्मि दीपेंद्र भटनागर ने खेल जगत में जिले का नाम राष्ट्रीय पटल पर रोशन किया है। अस्मि ने 15वीं मॉडर्न पेंटाथलॉन बायथल-ट्रायथलॉन राष्ट्रीय चैंपियनशिप में देश के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के बीच उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए ट्रायथलॉन स्पर्धा में स्वर्ण पदक (Gold Medal) और बायथलॉन स्पर्धा में रजत पदक (Silver Medal) अपने नाम किया है। उनकी इस दोहरी सफलता से मध्यप्रदेश और विशेषकर नीमच जिले में हर्ष की लहर है।
कम समय में तय किया बड़ी सफलता का सफर
अस्मि की यह सफलता इसलिए बेहद खास है क्योंकि उन्होंने खेल जगत में अपेक्षाकृत बहुत कम समय पहले कदम रखा था। मात्र दो वर्षों के कड़े प्रशिक्षण, कड़े अनुशासन और निरंतर अभ्यास के बल पर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में पोडियम पर जगह बनाना उनकी असाधारण खेल प्रतिभा को दर्शाता है। आज अस्मि नीमच के युवा खिलाड़ियों और विशेषकर बालिकाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनकर उभरी हैं।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और माता का संबल
अस्मि नीमच के प्रतिष्ठित भटनागर परिवार से संबंध रखती हैं। वह स्वर्गीय श्यामसुंदर भटनागर की पोती हैं। उनकी इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे उनके परिवार का मजबूत सहयोग रहा है। विशेष रूप से उनकी माता प्रियंका भटनागर ने हर मोड़ पर अस्मि का मार्गदर्शन किया, उनका उत्साहवर्धन किया और खेल के लिए एक सकारात्मक माहौल तैयार किया। नियमित अभ्यास से लेकर प्रतियोगिता के मैदान तक उनकी माता की भूमिका मार्गदर्शक के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण रही।
चुनौतीपूर्ण स्पर्धाओं में दिखाया दमखम
राष्ट्रीय चैंपियनशिप में देश भर से आए शीर्ष एथलीटों के बीच अस्मि ने तैराकी (Swimming), रनिंग (Running) और शूटिंग (Shooting) जैसे बेहद चुनौतीपूर्ण और तकनीकी कौशलों का प्रदर्शन किया। ट्रायथलॉन में सटीक निशानेबाजी और रफ्तार के दम पर उन्होंने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया, वहीं बायथलॉन में भी अपनी शारीरिक दक्षता का लोहा मनवाते हुए रजत पदक हासिल किया।
सफलता के पीछे दिग्गजों का मार्गदर्शन
अस्मि की इस स्वर्णिम सफलता को निखारने में खेल विशेषज्ञों और प्रशिक्षकों की एक पूरी टीम का अमूल्य योगदान रहा है, जिसके चलते नीमच की बेटी इस मुकाम तक पहुंच सकी:
मेंटर एवं मोटिवेटर: खेल की बारीकियां सिखाने और मानसिक रूप से मजबूत बनाने में मेंटर प्रभु मूलचंदनी जी तथा मोटिवेटर राकेश कोठारी जी का विशेष मार्गदर्शन एवं प्रेरणा रही।
कोचिंग टीम: अस्मि की खेल प्रतिभा को मैदान पर तराशने और तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाने में कोच आयुष गौड़, नीलेश घवारी, सुधा सोलंकी, अभिषेक अहीर, समीर जादौन और रोहित अहीर का विशेष और महत्वपूर्ण योगदान रहा।
भविष्य की अंतरराष्ट्रीय उम्मीद
कोचों के सही मार्गदर्शन, परिवार के अटूट विश्वास और स्वयं अस्मि की अथक मेहनत ने आने वाले वर्षों के लिए एक मजबूत नींव रख दी है। खेल प्रेमियों और जिलेवासियों को पूर्ण विश्वास है कि अस्मि भविष्य में न केवल राष्ट्रीय, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तिरंगा लहराकर देश का गौरव बढ़ाएंगी।