डेस्क न्यूज
11 May, 2026
प्रशासनिक
डेस्क। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के लाखों पेंशनरों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट बिलासपुर ने दोनों राज्य सरकारों को छठवें और सातवें वेतनमान के लंबित एरियर भुगतान को लेकर बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने 120 दिनों के भीतर पेंशनरों को 32 माह और 27 माह की एरियर राशि देने के निर्देश दिए हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी साफ कहा है कि कर्मचारियों और पेंशनरों के बीच महंगाई भत्ता और महंगाई राहत को लेकर किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जा सकता।
बिलासपुर हाई कोर्ट का बड़ा आदेश
वरिष्ठ चिंतक और पेंशनर हितैषी डॉ. चन्दर सोनाने ने बताया कि छत्तीसगढ़ पेंशनर संघ के प्रांताध्यक्ष चेतन भारती द्वारा वर्ष 2021 में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
कोर्ट ने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकारों को निर्देश दिए हैं कि छठवें वेतनमान का 32 माह का एरियर तथा सातवें वेतनमान का 27 माह का एरियर 120 दिनों के भीतर पेंशनरों को दिया जाए।
कर्मचारियों को मिला लाभ, पेंशनरों को नहीं
जानकारी के अनुसार दोनों राज्य सरकारों ने नियमित कर्मचारियों को छठवें और सातवें वेतनमान की एरियर राशि का भुगतान कर दिया था, लेकिन पेंशनरों को इससे वंचित रखा गया।
पेंशनर संगठनों का आरोप है कि वर्षों से ज्ञापन, आंदोलन और अधिकारियों से मुलाकात के बावजूद सरकारों ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया। मजबूर होकर उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
सुप्रीम कोर्ट ने भी दिया समानता का संदेश
10 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने भी महंगाई राहत को लेकर अहम फैसला सुनाया। जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने कहा कि राज्य सरकारें कर्मचारियों और पेंशनरों के बीच भेदभाव नहीं कर सकतीं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि महंगाई का असर कर्मचारियों और पेंशनरों दोनों पर समान रूप से पड़ता है, इसलिए महंगाई भत्ता और महंगाई राहत में अंतर करना संविधान के समानता सिद्धांत के खिलाफ है।
धारा 49(6) बनी विवाद की जड़
डॉ. सोनाने ने कहा कि मध्यप्रदेश राज्य गठन अधिनियम की धारा 49(6) का हवाला देकर वर्षों से पेंशनरों को समय पर महंगाई राहत नहीं दी जा रही।
आरोप है कि केन्द्र सरकार द्वारा महंगाई भत्ता बढ़ाने के बाद कर्मचारियों को तत्काल लाभ मिल जाता है, लेकिन पेंशनरों के मामले में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकारें आपसी सहमति और पत्राचार का बहाना बनाकर देरी करती हैं। इससे पेंशनरों को एरियर का नुकसान उठाना पड़ता है।
दोनों मुख्यमंत्रियों से अपील
पेंशनर संगठनों और डॉ. चन्दर सोनाने ने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से मांग की है कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का सम्मान करते हुए पेंशनरों के हित में शीघ्र निर्णय लिया जाए।
साथ ही धारा 49(6) को समाप्त करने के लिए केन्द्र सरकार को प्रस्ताव भेजने की मांग भी उठाई गई है, ताकि भविष्य में पेंशनरों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव न हो सके।