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पत्रकारिता में ईमानदारी और जनशक्ति की गूंज: मुकेश सहारिया एवं कपिल सिंह चौहान के अनुभवों से सजी 'कृति' की शाम

डेस्क न्यूज़ 04 May, 2026

नीमच । "सच्ची पत्रकारिता वही है जो किसी का अहित किए बिना समाज को आईना दिखाए और जनहित के मुद्दों पर सरकार और प्रशासन को झुकाने का साहस रखे।" यह विचार शहर की दो जानी-मानी मीडिया हस्तियों वरिष्ठ पत्रकार मुकेश सहारिया और कपिल सिंह चौहान ने अपने जीवन के उतार-चढ़ाव और अनुभवों को श्रोताओं के साथ साझा करते हुए 'कृति' संस्था द्वारा आयोजित 'मेरा जीवन मेरे अनुभव' कार्यक्रम में व्यक्त किए। दोनों वक्ताओं ने अपने संघर्ष, सिद्धांतों और पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर खुलकर चर्चा की।

सिद्धांतों से समझौता नहीं: मुकेश सहारिया
पत्रिका के ब्यूरो चीफ मुकेश सहारिया ने अपने शुरुआती संघर्षों और पत्रकारीय यात्रा को याद करते हुए कहा कि मैंने अपने पूरे करियर में कभी ऐसी पत्रकारिता नहीं की जिससे किसी का अहित हो। उन्होंने कहा कि "मेरी पत्रकारिता का सफर 'प्रभातकिरण' से शुरू हुआ, लेकिन सुंदरलाल पटवा जी द्वारा स्थापित समाचार पत्र 'अमृत मंथन' में मैंने पत्रकारिता का क ख ग सीखा।" उन्होंने अपने जीवन में गुरु नवनीत गुर्जर और गुरुदेव बिल्लोरे के मार्गदर्शन को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। रतलाम और नीमच में दैनिक भास्कर के साथ अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने पत्रकारिता के व्यावहारिक पहलुओं और ख़बरों के प्रकाशन की बारीकियाँ समझाईं।
श्री सहारिया ने भावुक होते हुए कहा कि उनकी ईमानदारी की नींव उनके परिवार के मूल्यों में बसी है। उन्होंने बताया,"मेरे नानाजी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे, मेरे मामाजी माधवराव सप्रे संग्रहालय (भोपाल) के संस्थापक रहे हैं और माता-पिता ने शिक्षा व सुरक्षा (सीआरपीएफ) के क्षेत्र में ईमानदारी से सेवा की है। परिवार की इसी विरासत के कारण मैंने कभी ऐसा कोई कार्य नहीं किया जिससे परिजनों के सम्मान पर कोई दाग लगे और ईमानदारी के रास्ते को कभी नहीं छोड़ा।"
वर्ष 2011 से 'पत्रिका' समूह के साथ निरंतर कार्यरत श्री सहारिया ने बताया कि उन्होंने तकनीक के बदलते दौर को बहुत करीब से देखा है। उन्होंने कहा, "मैंने वह समय भी देखा है जब अखबार 'क्रेडल मशीन' और 'कंपोजिंग' से छपते थे और आज मैं 'एआई' (Artificial Intelligence) तकनीक के साथ काम कर रहा हूँ। चुनौतियों के बीच निडर और निष्पक्ष पत्रकारिता करते हुए आज मैं अपने सफर से पूरी तरह संतुष्ट हूँ।"

जनता की एकजुटता ही लोकतंत्र की शक्ति, कलम से क्रांति ना हो तो सड़कों पर भी उतरना पड़ता है : कपिल सिंह चौहान
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के चर्चित चेहरे कपिल सिंह चौहान ने मुंबई में फिल्म और न्यूज चैनल के सफर से लेकर नीमच में पत्रकारिता तक के अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि एक दुखद मोड़ तब आया जब बड़े भाई की असामयिक दुर्घटना और निधन के कारण उन्हें अपना करियर छोड़ परिवार संभालने नीमच लौटना पड़ा। उन्होंने कहा कि उनके दादाजी और पिताजी के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ाव के कारण उनके पास राजनीति में जाने का सहज विकल्प था। बीजेपी के तत्कालीन जिलाध्यक्ष पवन पाटीदार ने उन्हें अवसर भी दिया, लेकिन उन्होंने सक्रिय राजनीति के बजाय पत्रकारिता को निरंतर रखते हुए समाज सेवा का मार्ग चुना।
नीमच मेडिकल कॉलेज आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने सांसद सुधीर गुप्ता के साथ ऐतिहासिक बहस से लेकर सरकार बदल जाने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के समय किये गए आन्दोलन के कई रोचक पहलुओं को उजागर किया। उन्होंने जोर देकर कहा, "नीमच में मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति इस बात का प्रमाण है कि यदि जनता और पत्रकार जनहित के मुद्दों पर एकजुट हो जाएं, तो असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि, "आम आदमी और पत्रकार किसी भी मंत्री या अधिकारी से ज्यादा ताकतवर हैं”। 

उन्होंने मुम्बई के अपने फ़िल्मी सफ़र में उस दौर के इंडस्ट्री के दिग्गजों व बाबा आजमी के साथ काम करने और आशा भोंसले का साक्षात्कार शूट करने के रोचक संस्मरण सुनाए।  

ऐतिहासिक संयोग और आयोजन
संस्था ‘कृति’ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष ओमप्रकाश चौधरी ने बताया कि नारद जयंती, विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस और हिंदी पत्रकारिता दिवस (उदन्त मार्तण्ड का स्थापना दिवस) का अनूठा संगम है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता राधेश्याम पाटीदार ने की। सरस्वती वंदना पुनीता निगम ने प्रस्तुत की। प्रभावी संचालन डॉ.अक्षय पुरोहित एवं सविता चौधरी ने किया तथा आभार सचिव रघुनंदन पाराशर ने प्रकट किया।

गणमान्य जनों की उपस्थिति
कार्यक्रम में शहर के प्रबुद्धजनों और संस्था सदस्यों की गरिमामय उपस्थिति रही, जिनमें मुख्य रूप से किशोर जेवरिया, प्रकाश भट्ट, डॉ. पृथ्वीसिंह वर्मा, सत्येन्द्रसिंह राठौर, डॉ. राजेन्द्र जायसवाल, अजय भटनागर, नीरज पोरवाल, जीवन कौशिक, गणेश खंडेलवाल, प्रियंका कवीश्वर, आशा सांभर, गोपाल पोरवाल, मुकेश कासलीवाल, डी.मित्तल, योगेश पाटीदार, कैलाश बाहेती, दिलीप दुबे, उमरावसिंह गुर्जर, शालीन सातपुते, अस्मिता सिंह, श्रीराम गोडबोले, शाहीन सातपुते, सपना सातपुते, घनश्याम कोरानने, रमेश कदम, राजमल व्यास, ज्ञानू व्यास, गोवर्धनलाल धनोतिया, शरद पाटीदार एवं रघुनंदन पाराशर आदी शामिल रहे.

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