डेस्क न्यूज़
26 April, 2026
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नीमच। जिला चिकित्सालय में अव्यवस्थाओं और लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने अस्पताल प्रबंधन और नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल परिसर में लगे वाटर कूलरों की हालत बेहद खराब पाई गई है, जिनसे स्टाफ और मरीज रोजाना पानी पीते हैं।
जानकारी के अनुसार, जब एक खराब वाटर कूलर का ढक्कन खोलकर देखा गया, तो उसके अंदर गंदगी और कचरे का अंबार मिला। यह स्थिति न केवल जिम्मेदारों की घोर लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि मरीजों और कर्मचारियों की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ भी साबित हो रही है।
हैरानी की बात यह है कि नगर पालिका द्वारा विधायक निधि से उपलब्ध कराया गया वाटर प्यूरिफायर और कूलिंग वाटर टैंकर भी पूरी तरह बेकार पड़ा है। अस्पताल परिसर में खड़ा यह टैंकर लंबे समय से उपयोग में नहीं लिया जा रहा है। न तो इसकी नियमित सफाई हो रही है और न ही इसमें पानी भरा जा रहा है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
वर्तमान में भीषण गर्मी का दौर चल रहा है, ऐसे में पानी जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव स्थिति को और भी गंभीर बना रहा है। अस्पताल के बाहर नगर पालिका द्वारा ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत दो पानी की नांद लगाई गई थीं, लेकिन उन्हें लगाने के बाद से अब तक दोबारा नहीं भरा गया। नतीजतन, यह नांद भी केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं।
स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि अस्पताल में दानदाताओं द्वारा लगाए गए वाटर कूलरों की भी उचित देखरेख नहीं की जा रही है। साफ-सफाई और नियमित मेंटेनेंस के अभाव में इनका उपयोग करना भी जोखिम भरा हो गया है।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर अस्पताल प्रबंधन और नगर पालिका इस गंभीर समस्या को लेकर क्यों उदासीन बने हुए हैं। नागरिकों ने संबंधित अधिकारियों से जल्द कार्रवाई करते हुए व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की है, ताकि मरीजों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल मिल सके।