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अतिक्रमण अभियान में उजड़ी दिव्यांग की रोजी-रोटी: “गुमटी लौटा दो, परिवार बच जाएगा”

द वाॅचमेन पोस्ट 21 April, 2026 प्रशासनिक

नीमच। शहर में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के बीच एक दिव्यांग की जिंदगी जैसे ठहर सी गई है। प्रशासन की कार्रवाई में जहां सड़कों से अवैध कब्जे हटाए जा रहे हैं, वहीं एक परिवार की रोजी-रोटी भी उजड़ गई है।
जनसुनवाई में पहुंचे ज्ञानप्रकाश खण्डेलवाल ने अपनी मार्मिक व्यथा सुनाते हुए प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की गुहार लगाई। उन्होंने बताया कि वह शारीरिक रूप से अक्षम हैं और मेहनत-मजदूरी करने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में सीआरपीएफ रोड पर लगाई गई उनकी छोटी सी चाय की गुमटी ही परिवार के जीवन का सहारा थी।
इसी गुमटी से उनकी पत्नी, दो बेटियों और एक बेटे का पालन-पोषण होता था। बच्चों की पढ़ाई से लेकर घर का हर खर्च उसी से चलता था। लेकिन अतिक्रमण हटाओ अभियान की कार्रवाई में जब उनकी गुमटी हटाई गई, तो उनके जीवन का एकमात्र सहारा भी छिन गया।
पीड़ित का आरोप है कि अभियान के बाद हटाई गई कई अन्य गुमटियां दोबारा अपने स्थान पर लग चुकी हैं, लेकिन उन्हें अब तक अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया और तीन बार कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर भी अपनी समस्या रखी, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी।
ज्ञानप्रकाश का कहना है कि वह कोई अवैध लाभ नहीं चाहते, सिर्फ इतना चाहते हैं कि उन्हें फिर से अपनी गुमटी लगाने की अनुमति मिल जाए, ताकि वह अपने परिवार का भरण-पोषण सम्मानपूर्वक कर सकें।
अतिक्रमण के खिलाफ सख्ती के बीच यह मामला अब एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है—क्या कार्रवाई के साथ संवेदनशीलता भी जरूरी नहीं?

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