डेस्क न्यूज
08 April, 2026
राजनीति
इंदौर. इंदौर नगर निगम के बजट सम्मेलन की शुरुआत बुधवार को अभूतपूर्व हंगामे के साथ हुई। राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के गायन के दौरान विपक्षी पार्षदों के रुख को लेकर सत्तापक्ष ने कड़ा विरोध जताया। विवाद इतना बढ़ा कि कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान ने सदन में तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि तुम्हारे बाप में दम हो तो कहलवाकर बता दो. इसके बाद बीजेपी पार्षदों ने सदन में जोर-जोर से वंदे मातरम के नारे लगाने शुरू कर दिए. सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए सभापति ने एक महिला पार्षद को पूरे दिन के लिए सदन से निष्कासित कर दिया।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव का रुख
विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने इसे राष्ट्र का अपमान बताया। उन्होंने मीडिया से चर्चा में कहा:
"राष्ट्रगीत का सम्मान करना किसी दल की नीति नहीं, बल्कि हर नागरिक का संवैधानिक और नैतिक दायित्व है। सदन की एक परंपरा रही है जिसका पालन अनिवार्य है। यदि कोई जन प्रतिनिधि सदन के भीतर राष्ट्रगीत का विरोध करता है, तो यह इंदौर की उस संस्कृति के खिलाफ है जो हमेशा राष्ट्रवाद के साथ खड़ी रही है।"
अधिकारियों और सभापति का पक्ष
सदन की कार्यवाही का संचालन कर रहे सभापति मुन्नालाल यादव ने अनुशासन का हवाला देते हुए कार्रवाई की। वहीं, निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस हंगामे के कारण बजट के महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर होने वाली तकनीकी चर्चा में देरी हुई। अधिकारियों का कहना है कि सदन की नियमावली के अनुसार, राष्ट्रगीत के समय सभी सदस्यों का मर्यादा में रहना अनिवार्य है, जिसका उल्लंघन होने पर नियमानुसार कार्रवाई की गई।
विवाद का केंद्र और विपक्षी तर्क
विवाद की शुरुआत तब हुई जब कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम और रुबीना इकबाल खान राष्ट्रगीत के समय अपनी जगह पर खामोश खड़ी रहीं। भाजपा पार्षदों ने उन पर गीत न गाने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी।
पार्षदों का तर्क: निष्कासित पार्षद फौजिया अलीम ने अपनी सफाई में कहा कि वह राष्ट्रगीत का सम्मान करती हैं और उसके सम्मान में खड़ी हुईं, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के कारण उन्होंने गायन नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा जानबूझकर इस मुद्दे को हवा दे रही है।
बजट पर असर
साढ़े तीन घंटे तक चले इस भारी शोर-शराबे के बीच विकास कार्यों और शहर के वित्तीय लेखा-जोखा पर चर्चा बाधित रही। हंगामे के बावजूद, अंततः बहुमत के आधार पर नगर निगम के वार्षिक बजट को स्वीकृति प्रदान कर दी गई। फिलहाल, सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई है। कांग्रेस के अन्य पार्षदों ने इस निष्कासन को 'लोकतंत्र की हत्या' करार देते हुए विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है, जबकि भाजपा खेमा राष्ट्रगीत के अपमान पर माफी की मांग पर अड़ा हुआ है।