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75 साल पुरानी परंपरा का अद्भुत नज़ारा: नीमच में रंग तेरस पर निकली भेरुजी की गैर, करे की खाल से हुआ स्नान

न्यूज डेस्क 17 March, 2026 अन्य

नीमच। पुराने शहर नीमच सिटी में मंगलवार को रंग तेरस का पर्व पारंपरिक आस्था, उल्लास और धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर माहेश्वरी मोहल्ले से वर्षों पुरानी परंपरा के तहत भेरुजी की गैर निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु और युवा वर्ग शामिल हुए।

रंग तेरस के मौके पर विशेष परंपरा निभाते हुए भूमिगत विराजमान भेरुजी की प्रतिमा को गड्ढे से बाहर निकाला गया। इसके बाद बकरे की खाल में भरे पानी से उनका विधिवत स्नान कराया गया। स्नान के पश्चात पूजा-अर्चना कर भेरुजी को दाल-बाटी और लड्डू का विशेष भोग अर्पित किया गया। यह अनूठी परंपरा क्षेत्र की आस्था और लोकसंस्कृति का प्रमुख प्रतीक मानी जाती है।

गैर माहेश्वरी मोहल्ले से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई पुनः वहीं आकर संपन्न हुई। इस दौरान प्रतिमा को ठेले पर विराजित कर नगर भ्रमण कराया गया। खेड़ापति बालाजी मंदिर में पूजा-अर्चना और भोग के बाद गैर आगे बढ़ी। मार्ग में श्रद्धालुओं ने गुलाल उड़ाकर और रंग खेलकर उत्सव का आनंद लिया।

गैर में शामिल युवाओं की टोली आकर्षण का केंद्र रही। वे बकरे की खाल में पानी भरकर भेरुजी के स्नान के साथ-साथ लोगों पर छिड़काव करते नजर आए, जिससे माहौल और भी उत्साहपूर्ण हो गया।

माहेश्वरी समाज के राकेश बाहेती के अनुसार यह परंपरा करीब 75 वर्षों से चली आ रही है। भेरुजी वर्षभर गड्ढे में विराजमान रहते हैं और केवल होली के अवसर पर ही बाहर निकालकर स्नान, पूजन और भोग लगाया जाता है। इसके बाद नवरात्रि में पुनः विधि-विधान से स्थापित किया जाता है।

यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने का भी माध्यम है।

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