कपिलसिंह चौहान
18 May, 2025
अपराध
कब तक IAS और IPS स्तर के ऑफीसर्स मुख्यमंत्री के आदेशों के मोहताज रहेंगे ?
मंदसौर। (कपिल सिंह चौहान) मन्दसौर में बीते दिनों एक अजीब घटना हुई। अशोक ट्रेवल्स की बस के ड्राइवर ने जानबूझकर रिवर्स लेकर 20-25 फीट पीछे खड़ी एक बस में टक्कर मार दी। गाड़ी में बैठी सवारियाँ बाल-बाल बची। जिस बस को टक्कर मारी गई उस जयश्री बस का आगे का ग्लास (विंडशील्ड) और बॉडी डेमेज हो गई।
फिलहाल स्पष्ट नहीं है कि ऐसी विकृत मानसिकता और सनक वाले ड्राइवर का इरादा क्या था? क्या पुलिस की यह जानने की भी मंशा नहीं है कि आखिर अशोक ट्रेवल्स का चालक पीछे खड़ी बस में बैठी किस सवारी की सुपारी लेकर बैठा था? किस सवारी की हत्या करना चाहता था ! या जयश्री बस के चालक-संचालक से उसकी किस बात की अदावत थी कि उसने इतनी जोर से पीछे खड़ी गाड़ी में रिवर्स लेकर टक्कर मारी? बगैर इस बात की परवाह किए कि दोनों बसों के बीच फँसकर कोई कुचला जा सकता था या बस में बेठी सवारियों को गंभीर चोट लग सकती थी और किसी की मौत भी हो सकती थी !
सभी बातों का जवाब मंदसौर पुलिस को देना है। क्योंकी मामला सार्वजनिक परिवहन सेवा से जुड़ा है और ये बसें आम नागरिकों की सुविधा के लिए चलाई जाती हैं, ना कि उनकी जान खतरे में डालने के लिए।
परंतु पुलिस, बस मालिकों की आपसी प्रतिस्पर्धा के बीच एक विकृत मानसिकता के साथ बस के स्टीयरिंग पर बैठे ड्राइवर द्वारा किए गए गंभीर अपराध को सिर्फ लापरवाही मान रही है! या तो मंदसौर पुलिस बस माफिया के दबाव में है या उससे व्यवहार निभा रही है, तभी तो मंदसौर पुलिस की तरफ से इस मामले में ढिलाई हो रही है।
तथ्यों को नजरअंदाज कर रही मंदसौर पुलिस
पुलिस की ढिलाई कैसे…! पुलिस ने जानबूझकर की गई घटना में ड्राइवर के खिलाफ मात्र सार्वजनिक मार्ग पर लापरवाही से वाहन चलाने के अपराध में बीएनएस की धारा 281 के तहत मामला दर्ज कर इति श्री कर ली है। घटना का एक कारण अशोक और जयश्री ट्रेवल्स के बीच आपसी प्रतिस्पर्धा के रूप में भी सामने आ रहा है। मगर उनकी आपसी प्रतिस्पर्धा क्या उन्हें सवारियों पर जानलेवा हमला करने की छूट देती है? सवारियों की सुरक्षा के प्रति पुलिस की कोई जिम्मेदारी नहीं ?
जानबूझकर टक्कर मारे जाने के साक्ष्य मौजूद -

घटना जानबूझकर की गई इसके साक्ष्य तो वीडियो में ही मौजूद हैं। जिस बस को टक्कर मारी गई उसका स्टाफ स्वयं बस के अंदर से वीडियो बना रहा है। वीडियो में उसकी आवाज आ रही है अपने साथी को सचेत करते हुए, कि आगे वाली बस का ड्राइवर उसकी गाड़ी को टक्कर मारने के लिए गाड़ी पीछे लेगा। और उसकी इस आवाज के बाद अशोक ट्रेवल्स की खड़ी बस तेजी से रिवर्स चलना शुरु करती है और पीछे खड़ी सवारियों से भरी जयश्री ट्रेवल्स की बस को जोरदार टक्कर मार देती है।
पुलिस द्वारा मामले में ढुलमुल रवैया
लापरवाही तो अचानक या गलती से होती है जानबुझकर नहीं। ना जाने क्यों पुलिस की यह जानने में रुचि नहीं है कि जयश्री बस के स्टाफ को पहले से कैसे पता था कि आगे खड़ी बस रिवर्स चलने लगेगी और पीछे उसे टक्कर मारेगी! मतलब यहां रोड रेज, जानबूझकर चोट और क्षति पहुंचाने की मंशा, अन्य सवारियों की जान जोखिम में डाले जाने के सारे तथ्य मौजूद हैं। मगर पुलिस ने सिर्फ लापरवाही से वाहन चलाने के अपराध की बीएनएस की धारा 281 के तहत मामला दर्ज कर इति श्री कर दी।
और तो और एफआईआर (FIR) देखिए- रिपोर्ट में फरियादी के हवाले से लिखवाया गया कि “मुझे और बस में बैठी सवारियों को कोई चोट नहीं लगी है”। FIR में लिखा गया यह कथन फरियादी के हित में लिखवाया गया या आरोपी के हित में, यह भी स्पष्ट होता है। शिकायतकर्ता ने बताया की लापरवाही शब्द भी पुलिस का दिया गया है।

इधर एक तरफ तो भोपाल बस दुर्घटना के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर मंदसौर-नीमच जिले में कारवाई के नाम पर चालान काटे जाने का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इस घटना में साफ तौर पर पुलिस और परिवहन विभाग की मंशा एक बड़े गंभीर मामले को नजरअंदाज कर उसे ‘लापरवाही की चादर’ से ढंकने की कोशिश प्रतीत हो रही है।
बस में सवार सवारियों के प्रति पुलिस की क्या जिम्मेदारी है ?
ट्रेवल्स वालों की आपसी प्रतिस्पर्धा अपनी जगह, पर क्या बस में सवार सवारियों की सुरक्षा के प्रति पुलिस की कोई जिम्मेदारी नहीं है? साथ ही यदि यह दो ट्रेवल्स की आपसी रंजिश या प्रतिस्पर्धा का मामला है तो क्या इस घटना के बाद वो रंजिश खत्म हो चुकी है? अभी तो सवारियों से भरी खड़ी बस को टक्कर मारी है, मगर कल को इस रंजिश की सनक और विकृत मानसिकता में चलती बस को टक्कर मार दी गई या कोई और बड़ी घटना हो गई तो जिम्मेदार कौन होगा?
आखिर कब तक IAS और IPS स्तर के स्मार्ट, एजूकेटेड़, डैशिंग और इंटेलिजेंट ऑफीसर्स मुख्यमंत्री के आदेशों के मोहताज रहेंगे ! कभी तो स्वविवेक से काम लीजिए जनाब।
अशोका ट्रेवल्स के स्टाफ ने सवारियों से भरी बस में आग लगा दी थी
‘सेंधवा बस कांड’ की स्मृतियाँ जीवंत हैं। 21 अगस्त 2011 को सेंधवा से साईंकृपा ट्रैवल्स और अशोका ट्रैवल्स की बस इंदौर के लिए निकली थी। सवारी बैठाने को लेकर दोनों बसों के बीच विवाद था। सेंधवा से 16 किमी दूर बालसमुंद चौकी के समीप अशोका ट्रैवल्स की बस चला रहे आरोपियों ने बस के ऊपर रखी बाइक से पेट्रोल निकाला। अशोका ट्रेवल्स के ड्राइवर, कंडक्टर और क्लीनर ने वहीं खड़ी साईंकृपा ट्रैवल्स की बस के दरवाजे लगाए और चारों तरफ पेट्रोल छिड़क दिया। इसके बाद आग लगाकर भाग निकले। जलती सवारियाँ चीखती-चिल्लाती रह गई। 15 लोग मौके पर ही जलकर मर गए थे। 10 लोगों को गंभीर अवस्था में इंदौर भर्ती करवाया गया था। कुछ ने खिड़कियों से कूद कर जान बचाई।
13 वर्ष पुरानी उस घटना में ड्राइवर कोई और था, अब 2025 में हुई घटना में ड्राइवर कोई और है लेकिन गाड़ी मालिक और मेनेजमेंट वही है। यह तथ्य यह समझने के लिए काफी है कि इस खतरनाक और खूनी प्रतिस्पर्धा का भयानक भाव स्टाफ में नहीं, बल्कि अशोका ट्रेवल्स के मालिकों और मेनेजमेंट में है और यह भाव आज भी उतना ही ताकतवर है। इसलिए मात्र किसी ड्राइवर पर छोटी सी लापरवाही का दोष लगा कर ‘सेंधवा बस कांड’ जैसे जघन्य हादसे की पुनरावृति को रोका जा सकना संभव नहीं होगा।
मामले में पुलिस का वर्ज़न
थाना प्रभारी संदीप मंगोलिया को मुद्दा बता कर जानकारी लेना चाही। मगर सवाल सुनने के बाद उनके द्वारा मीटिंग में व्यस्त होने की बात कह कर फोन नंबर 9977297672 डिस्कनेक्ट कर दिया गया।
- एसपी अभिषेक आनंद का नंबर 7049100447 नो-रिप्लाय रहा।
मामले में धाराएं बढ़ाए जाने, संचालकों की जिम्मेदारी तय करने, परमिट निरस्ती और कड़ी कारवाई जैसे सवालों पर पुलिस व परिवहन विभाग को ही जवाब देना है।
यशराज दोषी (अशोक ट्रेवल्स संचालक)- प्रतिस्पर्धा जैसी कोई बात नहीं है। ब्रेक फेल हुआ था. बस के ड्राइवर की लापरवाही पर उसे नौकरी से निकाला जा चुका है। बस थाने पर जब्त है। जो हुआ वो ठीक नहीं, आगे से ध्यान रखेंगे की ऐसी कोई घटना ना हो।
‘सेंधवा बस कांड’ में मृत यात्रियों को समर्पित द वॉचमेन पोस्ट की यह रिपोर्ट
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