डेस्क न्यूज
16 March, 2026
अन्य
नीमच। रमजान महीने की सबसे मुकद्दस और बरकतों वाली रात लैलतुल कद्र यानी शब-ए-कद्र आज सोमवार को अकीदत और एहतराम के साथ मनाई जाएगी। इस पवित्र रात को इस्लाम धर्म में विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि इसी रात कुरआन का नुज़ूल (अवतरण) हुआ था, इसलिए इसे हजारों रातों से बेहतर और रहमतों से भरी रात माना जाता है।
इस मौके पर शहर की सभी मस्जिदों में नमाज और इबादत का विशेष एहतमाम रहेगा। मुस्लिम समाज के लोग तरावीह की नमाज के बाद पूरी रात अल्लाह की इबादत, तिलावत और दुआओं में मशगूल रहेंगे। मस्जिदों के साथ-साथ घरों में भी लोग जागकर इबादत करेंगे और अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी तथा इंसानियत की भलाई की दुआ मांगेंगे।
शब-ए-कद्र के अवसर पर मुस्लिम समाज के लोग शहर के कब्रिस्तानों, जिन्हें “शहर-ए-खामोश” भी कहा जाता है, जाकर अपने दिवंगत परिजनों (मरहूमों) के लिए दुआ-ए-मगफिरत करेंगे। कब्रों पर फूल और इत्र पेश कर उनकी मगफिरत की दुआ की जाएगी तथा दरगाहों पर भी श्रद्धालु पहुंचकर दुआ और दान-पुण्य करेंगे।
मस्जिदों में पूरी रात धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। नमाज और दुआ के साथ तबर्रुक का वितरण भी किया जाएगा। कई स्थानों पर मिठाई और अजवाइन भी बांटी जाएगी। मुस्लिम बहुल इलाकों में रातभर रौनक और चहल-पहल बनी रहेगी।
शेख सैय्यद पठान कमेटी के सदर सलीम खान के अनुसार शब-ए-कद्र की रात रमजान की 21वीं, 23वीं, 25वीं या 27वीं रातों में से किसी एक रात को होती है। हालांकि यह निश्चित नहीं है कि कौन-सी रात शब-ए-कद्र है, लेकिन इन रातों में की गई इबादत और दुआ को अल्लाह खास तौर पर कबूल करता है।
उन्होंने बताया कि रमजान के आखिरी अशरे यानी अंतिम दस दिनों में कई लोग एतिकाफ में भी बैठते हैं। एतिकाफ का अर्थ है एकांत में रहकर पूरी तरह इबादत में लग जाना। एतिकाफ करने वाले लोग ईद का चांद दिखाई देने तक मस्जिद में रहकर अल्लाह की बंदगी करते हैं और मानवता, समाज की तरक्की तथा पूरी दुनिया की भलाई के लिए दुआ मांगते हैं।
गौरतलब है कि रमजान का अंतिम दौर चल रहा है। हाल ही में जुमातुल विदा (आखिरी जुम्मा) की नमाज भी अदा की गई, जिसमें मस्जिदों में बड़ी संख्या में नमाजी पहुंचे थे। रमजान का महीना पूरा होते ही दुनिया भर में ईद‑उल‑फित्र का त्योहार मनाया जाएगा। इस पवित्र महीने के अंतिम दिनों में इबादत और नेक कामों का महत्व और भी बढ़ जाता है।