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किडनी दान से भांजे को जीवन, गायत्री सापेड़िया बनी प्रेरणा ! अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अहमदाबाद में सम्मानित

डेस्क न्यूज 08 March, 2026 अन्य

नीमच। कलियुग के इस दौर में जहाँ रिश्तों में अक्सर दूरी बढ़ती दिखाई देती है, वहीं मध्यप्रदेश के नीमच की गायत्री सापेड़िया ने त्याग, ममता और मानवता की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने समाज को भावुक और प्रेरित कर दिया है। नीमच (मध्य प्रदेश) के डाइट (DIET) संस्थान में व्याख्याता के रूप में कार्यरत गायत्री सापेड़िया ने अपने गंभीर रूप से बीमार भांजे को किडनी दान कर नया जीवन प्रदान किया।

उनके इस निस्वार्थ निर्णय ने न केवल एक परिवार को संकट से बचाया, बल्कि समाज में रिश्तों की संवेदना और मानवता की नई मिसाल कायम की।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अहमदाबाद में अंगदान चैरिटेबल ट्रस्ट और शेल्बी मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स द्वारा एक विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया गया। अहमदाबाद मैनेजमेंट एसोसिएशन (एएमए) के एच.टी. पारेख हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम की थीम “She Gave Life Beyond Life” रखी गई थी। समारोह में उन साहसी महिलाओं और उनके परिवारों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने अंगदान के माध्यम से किसी को नया जीवन देने का महान कार्य किया।

इस अवसर पर नीमच की गायत्री सापेड़िया को उनके साहसिक और मानवीय निर्णय के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में गुजरात की शिक्षा राज्य मंत्री रिवाबा जडेजा और प्रसिद्ध गुजराती गायिका किंजल बेन दवे ने उन्हें “Honour of Your Selfless Gift” ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया। दोनों अतिथियों ने गायत्री सापेड़िया के साहस, संवेदनशीलता और मानवता की भावना की मुक्तकंठ से सराहना की।

गायत्री सापेड़िया, मनोज सापेड़िया की धर्मपत्नी, प्रसिद्ध शिक्षाविद् स्वर्गीय बलराज सापेड़िया की पुत्रवधू तथा प्रख्यात ज्योतिषाचार्य व शिक्षाविद् पंडित कमलाशंकर आचार्य की सुपुत्री हैं। अपने इस प्रेरणादायक कार्य से उन्होंने अपने मायके और ससुराल—दोनों परिवारों का नाम गौरवान्वित किया। समारोह में यह चर्चा का प्रमुख विषय रहा कि एक मामी द्वारा अपने भांजे के लिए इस प्रकार का त्याग आज के समय में अत्यंत दुर्लभ उदाहरण है।

मुख्य अतिथि  रिवाबा जडेजा ने कहा कि महिलाएँ केवल जीवन देने वाली ही नहीं होतीं, बल्कि अंगदान के माध्यम से किसी को नया जीवन देने की शक्ति भी रखती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रेरणादायक उदाहरण समाज में नई चेतना जगाते हैं और अंगदान के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस दौरान गायत्री सापेड़िया ने भी अपना अनुभव साझा किया और कहा कि अंगदान से किसी प्रकार की कमजोरी या परेशानी नहीं होती। उन्होंने स्वयं को सौभाग्यशाली बताया कि ईश्वर ने उन्हें किसी को नया जीवन देने का अवसर प्रदान किया। साथ ही उन्होंने अपने परिवार का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उनके निर्णय में पूरा साथ दिया।

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