ओमप्रकाश चौधरी
07 March, 2026
राजनीति
दुनिया भले आपस में लड़े-मरे पर हमारे देश में शांति है, और यही शान्ति इनको रास नही आ रही है-
रूस यूक्रेन,अमेरिका–इजराइल, ईरान से लेकर पाकिस्तान अफगानिस्तान तक जंग जारी है | इनमें भी रूस यूक्रेन को लड़ते झगड़ते चार साल बीत गए, अमेरिका इजराइल, ईरान मध्यांतर के बाद फिर एक दूसरे के सामने हैं | जबसे अफगानिस्तान में तालिबान दुबारा आया तब से ये दोनों भी गाहे बगाहे एक दूसरे को निपटाने में लगे हैं | इन सबके बीच बलूचिस्तानी जनता है जो पाकिस्तानी फ़ौज को मारने कूटने में लगी है | कहाँ तो बिचारे पाकिस्तान ने सोचा था कि तालीबानी दुबारा अफगानिस्तान में काबिज हो गए हैं तो वह इनके कंधे पर बंदूक रखकर भारत की नाक में दम करता रहेगा | लेकिन हो उल्टा गया ,अफगानिस्तान ने पाकिस्तान की नाक में दम कर रखा है | अब पाकिस्तान रोता घूम रहा है कि अफगानिस्तान भारत के इशारे पर उसे परेशान कर रहा है | गाजा में इजराइल ,हमास और हिजबुल्ला का झगडा थोड़े दिन पहले ही ठंडा पडा है | सांडों की लड़ाई और बागड़ का नाश यह कहावत इस युद्ध में बिलकुल सटीक बैठती है | भिड़े हमास हिजबुल्ला और इजराइल | परन्तु सबसे ज्यादा बर्बाद हुआ गाजा और लेबनान | यानि गेंहू के साथ घुन भी पिस गए | अब हिजबुल्ला फिर आधी रोटी में दाल लेने आ गया नतीजा लेबनान जो न तीन में हैं न तेरह में फिर धू धू कर जल रहा है |
यूक्रेन जो कभी पुराने सोवियत संघ का ही भाग था , लेकिन जब सोवियत संघ ताश के महल की तरह भरभरा कर बिखरा तो रूस और यूक्रेन भी अलग-अलग हो गये | एक देश 14 टुकड़ों में बंट गया | इनमें भी पहले रूस ,चेचेन्या और बेला रूस आपस में भिड़े वे ठंडे पड़े तो यूक्रेन को लगा कि उसे नाटो की छतरी की जरूरत है तो वह यूरोप की गोद में बैठने को बेताब हो गया | यूक्रेन की यही बेताबी उसके पुराने साथी रूस को अच्छी नहीं लगी | बस रार शुरू हो गई | बंदर के न्याय की तरह यूरोप और अमेरिका ने यूक्रेन की पीठ थपथपाना शुरू कर दिया | हम हैं ना कहकर यूक्रेन को रूस से भिड़ा दिया | इस सबमें यूक्रेन का कोई भला हुआ हो या न हुआ हो इन हथियार के सौदागरों की चांदी हो गई | यूक्रेन बर्बाद होता रहा और उस पर इन देशों का हथियारों के नाम पर कर्ज चढ़ता गया | नुकसान तो रूस का भी कम नही हुआ पर क्या करें साहब अब सवाल नाक का जो ठहरा तो चार साल हो गए जंग जारी है | दुनिया का चौधरी बना अमेरिका जंग रुकवाने के नाम पर कभी इससे तो कभी उससे बतियाता है और साथ ही साथ धमकाता भी है | पर हो कुछ नहीं रहा नतीजा ढाक के वही तीन पात |
अरब इजराइल की लाग डाट बरसों पुरानी है | पड़ोसियों को समझ आ गया तो मिस्र ,सीरिया ,जोर्डन , लेबनान इजराइल से समझौता करके शान्ति से रहने लगे | लेकिन ईरान और कतर को यह शान्ति अच्छी नही लगी एक हमास को और दूसरा हिजबुल्ला को पालने पोसने लग गए| नतीजा फिलिस्तीनी और गाजा तथा लेबनानी आये दिन इनके लड़ाई झगडे में पिस रहे हैं | सीरिया बचा था उसे आपसी गृह युद्ध ने बर्बादी के कगार पर लाकर खडा कर दिया | इजराइल को नष्ट करने का ईरान का सपना बरसों पुराना है | इसीलिए वह परमाणु बम बनाने की जुगाड़ में लगा है | नतीजा अमेरिका जो इजराइल का सबसे बड़ा रक्षक है ईरान को रास्ते पर लाने की कोशिश करता रहा | पर ईरान कुत्ते की पूंछ की तरह सीधे होने का नाम नही ले रहा | नतीजा उस पर जमाने भर के प्रतिबन्ध लाद दिए | भले ही मेरे घर की दीवार टूट जाए पर पड़ोसी की बकरी मरनी चाहिए इसी कहावत को साकार कर रहा है ईरान | इजराइल को बर्बाद करने की सनक में खुद के अस्तित्व को दांव पर लगा बैठे हैं उसके हुक्मरान | परिणाम सामने है छ: महीने में दूसरी बार ईरान धधक उठा है | शीर्ष नेता और सेना के अफसर 72 हूरों के पास पंहुच गए | ईरान खुद तो सांसत में फंसा ही है उसने अपने सारे पडोसी देशों को भी युद्ध चपेट में ले लिया | अब एक ही धर्म का भाईचारा दम तोड़ चुका है और सारे समानधर्मी देश ईरान को लड़ता- भिड़ता, पिटता हुआ देखकर भी चुपचाप तमाशा देख रहे हैं |
इन सारे युद्धों के बीच संयुक्त राष्ट्र संघ कहाँ है किसी को नही पता, उसके महासचिव किस शीत निद्रा में मग्न है कोई नही जानता | शांति के नए मसीहा अमेरिकन चौधरी शान्ति के नोबेल पुरस्कार की चाह में कभी भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाने का दावा कर रहे हैं तो कभी रूस यूक्रेन के बीच अम्पायर बन रहे हैं तो कभी गाजा पीस मिशन का गठन करके खुद ही उसके सर्वे सर्वा बन गए हैं | इस बीच एक खेल उन्होंने हमारे पडोसी बँगला देश में भी खेला वहां एक पुराने शान्ति के नोबेल विजेता को सत्ता का सर्वे सर्वा बना दिया नतीजा पूरा बंगला देश सुलग उठा| लेकिन इस सारी उठक बैठक से हासिल कुछ नही हुआ | न रूस यूक्रेन लड़ना बंद हुए न भारत उनके शान्ति के दावे को मानने को तैयार हुआ न शान्ति का नोबेल ही मिला | न खुदा ही मिला न विसाले सनम की मुद्रा में सब दूर से थक हार कर अमेरिका के बडबोले मुखिया ने फिर अपना वही पुराना खेल शुरू कर दिया दुनिया को नई जंग का तोहफा दे दिया , जिसमें हमेशा कि तरह वे और उनका देश फिर चौतरफा घिरते नजर आ रहे हैं ,जैसे वे बरसों पहले वियेतनाम में और फिर अफगानिस्तान में फंसे थे और वहां से बड़े बे आबरू होकर निकले थे |
लड़ने वाले लड़ रहे हैं ,परन्तु हमारे देश में कुछ दल और नेता इसमें भी अपने वोट बैंक को रिझाने का मौक़ा तलाश रहे हैं | वे आये दिन देश के मुखिया को कभी विदेश नीति पर तो कभी शोक प्रकट करने को लेकर ज्ञान दे रहे हैं और अपने सबसे प्रिय काम गरियाने में लगे हैं | कुछ हैं जिन्हें बाहर कुछ भी हो अपने यहाँ प्रदर्शन जरुर करना है वे लगे हैं जुलुस निकालने में | इन सबकी ये हरकतें बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना जैसी ही हैं | दुनिया भले आपस में लड़े-मरे पर हमारे देश में शांति है, और यही शान्ति इनको रास नही आ रही है | देश के मुखिया की चिंता इन युद्ध ग्रस्त देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा है,पर विपक्षियों को चिंता है केवल अपनी राजनीति की | जंग है कि फिर भी जारी है, देशवासी त्यौहार मनाकर शान्ति से इन्तजार कर रहे हैं कि आखिर यह जंग का ऊंट बैठेगा किस करवट |