डेस्क न्यूज
21 February, 2026
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नीमच। मुकद्दस माह रमज़ान के दूसरे रोज़े के साथ पहला जुम्मा अदा किया गया तो शहर रूहानियत में सराबोर नजर आया। जामा मस्जिद, नीमच और नसरुल्ला खां मस्जिद, नीमच सहित अन्य मस्जिदों में नमाज़ियों की लंबी कतारें दिखाई दीं। अज़ान की सदा गूंजते ही बड़ी तादाद में अकीदतमंद जुम्मे की नमाज़ के लिए उमड़ पड़े।
नमाज़ से पहले इमामों ने खुत्बा देते हुए रोज़े की फज़ीलत, सब्र-ओ-शुक्र, तक़वा और इख़्लास पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि रमज़ान केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं, बल्कि नफ्स की पाकीज़गी, गुनाहों से तौबा और अल्लाह की रज़ा हासिल करने का महीना है। रोज़ा इंसान को परहेज़गारी सिखाता है और गरीबों-मिस्कीनों का एहसास कराता है। रमज़ान में की गई हर नेकी का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है।
नमाज़ के बाद रोज़ेदारों ने मुल्क में अमन-ओ-अमान, खुशहाली और भाईचारे की दुआ मांगी। मस्जिदों के बाहर अनुशासन और बेहतर इंतज़ाम का खूबसूरत नज़ारा देखने को मिला। नौजवान, बुज़ुर्ग और बच्चे अदब-ओ-एहतराम के साथ इबादत में मशगूल रहे। कई स्थानों पर ज़रूरतमंदों के लिए खैरात और राशन वितरण की तैयारियां भी नजर आईं।
शाम ढलते ही शहर के विभिन्न इलाकों में सामूहिक रोज़ा-इफ्तार का एहतमाम किया गया। खजूर और पानी से इफ्तार के बाद मगरिब की नमाज़ अदा की गई। नीमच में रमज़ान का यह पाक महीना इबादत, सब्र और मोहब्बत का पैगाम दे रहा है। रोज़ेदार दुआ कर रहे हैं कि माह-ए-रमज़ान सबके लिए रहमत, मगफिरत और निजात का सबब बने तथा समाज में आपसी सौहार्द और इंसानियत की रौशनी कायम रहे।