जगदीश पोरवाल
17 February, 2026
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भवानीमंडी। जब इरादे मजबूत हों तो तंगहाल हालात भी रास्ता नहीं रोक पाते। संघर्ष की धूप में तपकर ही सफलता का सोना निखरता है। भैसोदामंडी के 18 वर्षीय तनिष्क जैन ने यह साबित कर दिया कि अगर हौसले बुलंद हों तो किस्मत की लकीरें भी बदल जाती हैं।
दो साल की उम्र में मां का साया सिर से उठ गया। घर की आमदनी सिलाई मशीन की खटखट और दादा के ठेले की रोज़ की मेहनत तक सीमित रही। संसाधन कम थे, मगर सपने बड़े। इन्हीं सपनों को हकीकत में बदलते हुए तनिष्क ने JEE (Joint Entrance Examination) में 99.30 पर्सेंटाइल हासिल कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया।
उनके पिता पारस जैन पेशे से टेलर हैं, जबकि दादा ठेला चलाकर परिवार का सहारा बने हुए हैं। सीमित साधनों के बावजूद परिवार ने पढ़ाई में कभी कमी नहीं आने दी। तनिष्क ने अपनी स्कूली शिक्षा राजकीय सेठ आनंदीलाल पोद्दार सीनियर उच्च माध्यमिक विद्यालय, भवानीमंडी से पूरी की।
पहली असफलता से सीखा, हार नहीं मानी
12वीं के बाद तनिष्क ने बिना किसी कोचिंग के IIT की तैयारी शुरू की। पिछले वर्ष पहली बार JEE परीक्षा दी, जिसमें 96.23 पर्सेंटाइल प्राप्त हुए। उन्हें सिविल शाखा और जम्मू का कॉलेज आवंटित हुआ, लेकिन मनचाही ब्रांच और संस्थान न मिलने पर उन्होंने प्रवेश नहीं लिया।
निराशा के क्षण आए, लेकिन इरादे नहीं डगमगाए। पूरे एक वर्ष तक और अधिक अनुशासन व समर्पण के साथ तैयारी की। सोमवार को घोषित परिणाम में 99.30 पर्सेंटाइल हासिल कर उन्होंने अपने संघर्ष को सफलता की नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया।
परिवार में जश्न, क्षेत्र में गर्व
जैसे ही परिणाम सामने आया, घर में खुशियों की लहर दौड़ गई। पिता और दादा के लिए यह वर्षों की मेहनत का फल था। पड़ोसियों और परिचितों ने बधाइयां देकर इसे पूरे क्षेत्र का गौरव बताया।
अब IIT एडवांस पर नजर
तनिष्क का अगला लक्ष्य JEE Advanced है। उनका सपना IIT में कंप्यूटर साइंस शाखा में प्रवेश लेकर तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाना है।
तनिष्क की कहानी यह संदेश देती है कि सफलता संसाधनों से नहीं, संकल्प से तय होती है। हालात चाहे जैसे भी हों, मेहनत और विश्वास के आगे हर मुश्किल छोटी पड़ जाती है।