डेस्क न्यूज
13 February, 2026
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नीमच। कहते हैं हौसले हों तो मिट्टी भी सोना उगलती है। यह सच कर दिखाया है नीमच के युवा उद्यमी पूरबसिंह ने, जिन्होंने लहसुन की खेती से जुड़े अपने अनुभव को उद्योग में बदला और आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गए हैं।
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना ने उनके सपनों को पंख दिए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में चल रही इस योजना ने युवाओं को रोजगार देने और स्वरोजगार की राह पर आगे बढ़ाने का मजबूत मंच दिया है।
नीमच की कृषि उपज मंडी चंगेरा के पास पूरबसिंह ने लहसुन प्रसंस्करण इकाई स्थापित की। उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में वर्ष 2024-25 में योजना का लाभ लेकर उन्होंने लहसुन की कली निकालने, ग्रेडिंग और आकर्षक पैकिंग का आधुनिक काम शुरू किया। आज उनके यहां तैयार पैकिंग की गई लहसुन की कली अहमदाबाद सहित कई शहरों में अच्छे दामों पर बिक रही है।
इस उद्योग की खास बात सिर्फ मुनाफा नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकार भी है। उनकी यूनिट में 7 से 8 स्थानीय महिलाओं को रोजगार मिला है। गांव की महिलाएं अब घर की जिम्मेदारी निभाने के साथ आर्थिक रूप से भी सशक्त हो रही हैं।
उद्योग स्थापना के लिए पूरबसिंह को भारतीय स्टेट बैंक की दशहरा मैदान शाखा से 30 लाख रुपये का ऋण(लोन) मिला, वहीं शासन की ओर से 10 लाख रुपये का अनुदान (सब्सिडी) भी प्रदान किया गया। वे नियमित रूप से ऋण की अदायगी कर रहे हैं और अपने कारोबार को लगातार विस्तार दे रहे हैं।
किसानों से सीधे लहसुन की खरीद, प्रोसेसिंग और ब्रांडेड पैकिंग—इस पूरी श्रृंखला ने उन्हें स्थानीय बाजार से राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचा दिया है। यह मॉडल अब अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के मार्गदर्शन में नीमच जिला पीएमएफएमई योजना के क्रियान्वयन में प्रदेश और संभाग के अग्रणी जिलों में शामिल है। अब तक 205 हितग्राहियों को योजना से लाभान्वित किया जा चुका है, जबकि इस वित्तीय वर्ष में 120 नई उद्योग इकाइयां स्थापित करवाई गई हैं।
यह सिर्फ एक उद्योग की कहानी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की मजबूत होती नींव की गूंज है—जहां युवा हाथों ने अवसर को पहचाना और तकदीर खुद लिख डाली।