न्यूज डेस्क
04 February, 2026
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नीमच। शहर में मुस्लिम समाज का पवित्र पर्व शबे-ए-बरात पूरी अकीदत, श्रद्धा और धार्मिक भावनाओं के साथ शांतिपूर्ण वातावरण में मनाया गया। इस मुकद्दस रात को लेकर शहर की मस्जिदों, घरों और कब्रिस्तानों में विशेष रौनक देखने को मिली। मंगलवार शाम से ही इबादत का सिलसिला शुरू हो गया, जो देर रात और पूरी रात तक जारी रहा।
इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार शबे-ए-बरात वह पाक रात मानी जाती है, जिसमें अल्लाह तआला अपने बंदों की दुआएं कुबूल करता है, गुनाहों की मगफिरत फरमाता है और आने वाले साल की तकदीरें लिखी जाती हैं। इसी वजह से इस रात को रहमत, बरकत और माफी की रात कहा जाता है। मुस्लिम समाज के लोग इस अवसर पर जागकर नमाज, कुरान की तिलावत, जिक्र और दुआ में मशगूल रहे।
शहर की मस्जिदों में ईशा की नमाज के बाद बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों ने नफ्ल नमाज अदा की और अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगी। महिलाओं और लड़कियों ने घरों में रहकर इबादत की तथा परिवार की सलामती, कारोबार में बरकत, आपसी भाईचारे और देश में अमन-चैन के लिए दुआएं कीं। कई लोगों ने रोजे रखे और अपने मरहूम बुजुर्गों की फातेहा भी दिलाई।
शबे-ए-बरात के अवसर पर शहर के कब्रिस्तानों, विशेषकर शेर-ए-खामोश कब्रिस्तान, में विशेष रोशनी की व्यवस्था की गई। देर रात तक लोग अपने माता-पिता और दिवंगत रिश्तेदारों की कब्रों पर पहुंचकर फातेहा पढ़ते और दुआ करते नजर आए। पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक और शांत वातावरण बना रहा।
इस अवसर पर मुस्लिम समाज की ओर से शांति व्यवस्था, लाइटिंग और सुरक्षा के बेहतर इंतजामों के लिए प्रशासन का आभार व्यक्त किया गया। कुल मिलाकर नीमच में शबे-ए-बरात का पर्व धार्मिक श्रद्धा, भाईचारे और आध्यात्मिक शांति के संदेश के साथ संपन्न हुआ।