डेस्क न्यूज
19 January, 2026
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कौन जिम्मेदार है, जो जिले की स्वास्थ्य योजनाओं को लागू नहीं कर पा रहा है। क्या प्रदेश को दिशा देने वाले जिम्मेदारों ने अपने दायित्व और कर्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन किया है?
डॉ. जाजू ने बताया कि केंद्र सरकार ने नीमच जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं के उन्नयन और आमजन को त्वरित व सुदृढ़ चिकित्सा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नवंबर 2019 में चिकित्सा महाविद्यालय की स्वीकृति प्रदान की थी। इससे पूर्व नीमच जिला चिकित्सालय में ट्रॉमा सेंटर की स्थापना की योजना को भी मंजूरी दी गई थी।
चिकित्सा महाविद्यालय की स्वीकृति के बाद केंद्र सरकार ने जिला चिकित्सालय में क्रिटिकल केयर सुविधाओं के लिए राशि आवंटित की तथा नर्सिंग कॉलेज को भी स्वीकृति प्रदान की।
उन्होंने कहा कि छह वर्ष बीत जाने के बावजूद जिस उद्देश्य से चिकित्सा महाविद्यालय की स्वीकृति दी गई थी, उसका लाभ धरातल पर कहीं भी दिखाई नहीं दे रहा है। आज भी जिला चिकित्सालय दशकों से रेफरल अस्पताल के रूप में ही अपनी पहचान बनाए हुए है।
जिला चिकित्सालय में मानव संसाधनों की कमी वर्षों से बनी हुई है, लेकिन इसे दूर करने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए।
डॉ. जाजू ने जिले के जनप्रतिनिधियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि जनता ने जिन पर विश्वास कर लगातार समर्थन दिया, वे जनता की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पाए हैं और निरंतर आमजन की समस्याओं की उपेक्षा कर रहे हैं।
तथाकथित विकासवादी सोच का मुखौटा लगाकर जनता को भ्रमित किया जा रहा है और उनके साथ शोषण किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जिले के जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली का उद्देश्य केवल झूठा श्रेय लेना और निजी स्वार्थों की पूर्ति करना रह गया है। उन्हें आमजन, विशेषकर गरीब वर्ग के स्वास्थ्य से कोई वास्तविक सरोकार नहीं है।
दिखावटी सहानुभूति के माध्यम से लोगों का ध्यान भटकाकर शोषण किया जा रहा है।
डॉ. जाजू ने अंत में कहा कि दिशाहीन, कर्तव्यहीन और दायित्वों के निर्वहन में असक्षम जनप्रतिनिधियों से किसी ठोस पहल की उम्मीद करना बेमानी है। ईश्वर उन्हें सद्बुद्धि प्रदान करे।