मनीष नायक
10 January, 2026
अन्य
नीमच | जिले की जावद तहसील में शिकारियों ने तीन साल के नर तेंदुए की कुल्हाड़ी से निर्मम हत्या कर दी। वहीं आरोप है कि वन विभाग ने चार दिनों तक इस सनसनीखेज घटना को दबाने की कोशिश की और मीडिया को भ्रामक जानकारी दी। अब इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
घटना 4 जनवरी की है। मनासा वन परिक्षेत्र की बैसदा बीट में वन विभाग को मृत तेंदुए का शव मिलने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे मामले की जांच शुरू की गई। तेंदुए का पोस्टमार्टम वन्यजीव विशेषज्ञ चिकित्सकों (1) डॉ. जीवन नाथ एवं (2) डॉ. भूपेश पाटीदार द्वारा किया गया।
घटना के दूसरे दिन वन विभाग की ओर से जारी प्रेस नोट में दावा किया गया कि वन्यजीव तेंदुए के शरीर के सभी अंग सुरक्षित पाए गए हैं। लेकिन शुक्रवार को इस मामले में जावद तहसील के जनकपुर और परवनी निवासी तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया और खुलासा किया गया कि तेंदुए पर कुल्हाड़ी से हमला कर उसकी हत्या की गई थी।
जंगली सूअर को पकड़ने के लिए लगाया गया जाल, तेंदुआ फंसा
जावद तहसील के जनकपुर निवासी सुनील भील, परवनी निवासी देवीलाल भील और अंबालाल भील ने जंगली सूअर के शिकार के लिए जाल लगाया था, जिसमें तेंदुआ जा फंसा। इसके बाद आरोपियों ने जाल में फंसे तेंदुए पर कुल्हाड़ी से वार कर उसकी हत्या कर दी और मृत तेंदुए के शव को मनासा वन परिक्षेत्र में फेंक आए।
सरपंच और सचिव ने बताई सच्चाई
वन विभाग का यह दावा तब गलत साबित हुआ जब स्थानीय ग्रामीणों, सरपंच और सचिव ने घटना की असल सच्चाई सामने रखी। मीडिया द्वारा उपवन मंडल अधिकारी प्रदीप कछावा से सवाल पूछे जाने के बाद विभाग को अपनी गलती स्वीकार करनी पड़ी और माना गया कि तेंदुए का शिकार हुआ था।
पहले अंग सुरक्षित होने का दावा, बाद में कुल्हाड़ी से हत्या का खुलासा
घटना के दूसरे दिन वन विभाग की ओर से जारी प्रेस नोट में कहा गया था कि वन्यजीव तेंदुए के शरीर के सभी अंग सुरक्षित पाए गए हैं और शिकार के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। लेकिन शुक्रवार को जब इस पूरे मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, तब खुलासा हुआ कि तेंदुए की कुल्हाड़ी से हत्या की गई थी। कभी अंग सुरक्षित होने का दावा, तो कभी हत्या का खुलासा—यह वन विभाग की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है।
पूरे मामले में हो उच्च स्तरीय जांच
अब इस गंभीर मामले को दबाने में कथित रूप से शामिल वन मंडल अधिकारी एस.के. अटोदे, पोस्टमार्टम करने वाले विशेषज्ञ डॉ. जीवन नाथ, डॉ. भूपेश पाटीदार और संबंधित क्षेत्र के लापरवाह कर्मचारियों की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है।