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23 साल बाद भी नहीं मिला कब्ज़ा ! मांडा महेन्द्री गांव के आदिवासी किसानों का टूटा सब्र, प्रशासन को दी आंदोलन की चेतावनी 

डेस्क न्यूज 02 January, 2026 अन्य

नीमच। जिले की जावद तहसील अंतर्गत ग्राम मांडा महेन्द्री में पट्टाधारी आदिवासी परिवारों को वर्षों बाद भी कृषि भूमि का कब्जा नहीं मिलने का मामला एक बार फिर गरमा गया है। शुक्रवार को ग्रामीण किसान नेता राजकुमार अहीर के नेतृत्व में कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और कलेक्टर प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

ज्ञापन में बताया गया कि वर्ष 2002 में तत्कालीन तहसीलदार टप्पा रतनगढ़ द्वारा प्रकरण क्रमांक 53/ए/क्यू/1/2001-2002 के तहत ग्राम मांडा महेन्द्री के 50 से अधिक आदिवासी परिवारों को पट्टे वितरित किए गए थे। पटवारी हल्का नंबर 33 के सर्वे नंबर 3/2 की भूमि में प्रत्येक परिवार को एक-एक हेक्टेयर कृषि भूमि स्वीकृत की गई थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि 23 साल बीत जाने के बावजूद आज तक एक भी परिवार को जमीन का वास्तविक कब्जा नहीं दिलाया गया।

ग्रामीणों का आरोप है कि कब्जा पाने के लिए वे वर्षों से राजस्व कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला। खेती योग्य भूमि होते हुए भी वे खेती नहीं कर पा रहे हैं, जिससे आदिवासी परिवारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। आर्थिक तंगी के चलते कई परिवार कर्ज और पलायन की स्थिति में पहुंच चुके हैं।

इस मौके पर किसान नेता राजकुमार अहीर ने तीखे शब्दों में कहा कि यदि गरीब आदिवासियों का सबसे ज्यादा शोषण हुआ है तो वह भाजपा शासनकाल में हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि वन विभाग के कुछ अधिकारी अपनी मनमर्जी से गरीब आदिवासियों की जमीन पर कब्जा किए बैठे हैं। शासन द्वारा विधिवत पट्टा दिए जाने के बाद भी जमीन न मिलना सीधे-सीधे प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की संवेदनहीनता को दर्शाता है।

किसान नेता ने मांग की कि संबंधित अधिकारियों को तत्काल निर्देश दिए जाएं, मौके पर पहुंचकर सीमांकन कराया जाए और पट्टाधारी आदिवासी किसानों को उनकी जमीन का कब्जा दिलाया जाए | 

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे मजबूरन आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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