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पढ़ाई की जिद ने जीत लिया दिल ! किताबों के लिए रोती नन्ही बच्ची की मदद को मैदान में उतरी पुलिस टीम, सीसीटीवी से तलाशकर लौटाया खोया स्कूल बैग

डेस्क न्यूज 26 December, 2025 अन्य

शाजापुर शुजालपुर। एक नन्ही बच्ची की पढ़ाई के प्रति लगन और मासूम जिद ने शुजालपुर पुलिस को भी भावुक कर दिया। तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा का स्कूल बैग ऑटो में छूट गया, लेकिन किताबों और वर्कबुक की चिंता में रोती बच्ची को देखकर पुलिस ने इसे अपना दायित्व समझा और पूरी संवेदनशीलता के साथ बैग तलाशने में जुट गई। अंततः पुलिस की तत्परता और मानवीय पहल से बच्ची का खोया हुआ बैग मिल गया और उसके चेहरे पर फिर से मुस्कान लौट आई।

मामला मध्यप्रदेश के शाजापुर जिले के शुजालपुर मंडी थाना क्षेत्र का है। सरस्वती शिशु मंदिर में पढ़ने वाली तीसरी कक्षा की छात्रा चेरी नायक गुरुवार को अपनी मां पूजा, दादी कृष्णा और बुआ रंजना के साथ स्कूल गई थी। स्कूल से लौटते समय उसका बैग ऑटो में ही छूट गया। घर पहुंचने पर जब बैग नहीं मिला तो चेरी फूट-फूटकर रोने लगी। उसे इस बात की चिंता सता रही थी कि उसकी सारी किताबें और वर्कबुक उसी बैग में थीं।

परिजनों ने नया बैग और किताबें दिलाने का आश्वासन दिया, लेकिन चेरी अपनी जिद पर अड़ी रही। उसने साफ कहा कि उसे वही बैग चाहिए और इसके लिए पुलिस से मदद लेनी होगी। बच्ची की पढ़ाई के प्रति लगन और मासूम जिद देखकर पिता संदीप नायक और दादा अशोक नायक उसे शुजालपुर मंडी थाने लेकर पहुंचे।

थाने में चेरी ने खुद एसडीओपी निमिष देशमुख को अपनी समस्या बताई। उसकी आंखों में आंसू देखकर एसडीओपी ने तुरंत मामले को गंभीरता से लेते हुए बैग तलाशने के निर्देश दिए। ट्रैफिक पुलिस की मदद से शहरभर के सीसीटीवी कैमरों की जांच शुरू की गई।

सीसीटीवी फुटेज में चेरी जिस ऑटो में बैठी थी, वह तो नजर आया, लेकिन ऑटो पर नंबर प्लेट नहीं थी। इसके बावजूद पुलिस ने ऑटो पर लिखे नाम और उसके डिजाइन के आधार पर खोज जारी रखी। लगातार पूछताछ के बाद ऑटो चालक परवेज की पहचान हुई और उससे संपर्क किया गया।

ऑटो चालक परवेज ने बताया कि उसे ऑटो में एक स्कूल बैग मिला था, जिसे वह सुरक्षित अपने घर ले गया था। शुक्रवार सुबह वह बैग लेकर थाने पहुंचा। पुलिस ने चेरी को बुलाया और पूरे स्नेह के साथ उसका बैग उसे सौंप दिया। अपना बैग पाकर चेरी की खुशी देखते ही बन रही थी। उसने मुस्कुराते हुए पुलिस को “थैंक यू” कहा।

इस मानवीय पहल से न सिर्फ एक बच्ची की मुस्कान लौटी, बल्कि पुलिस की संवेदनशील और जिम्मेदार छवि भी एक बार फिर सामने आई।

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