डेस्क न्यूज
25 December, 2025
नीमच। झांझरवाड़ा ओद्योगिक क्षेत्र स्थित मालवा पेट्रो प्रोडक्ट्स फेक्ट्री में आग लगने से हुए हादसे में घायल हुए एक श्रमिक की मौत हो गयी और 3 अन्य घायल हो गए... मृतक के परिवार के भविष्य को लेकर चिंतित परिजनों और शुभचिंतकों ने फेक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ कारवाई और मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया तो फेक्ट्री प्रबंधको द्वारा 15 लाख रुपये मुआवजा और परिवार को पेंशन की बात पर मामला शांत हुआ... मृतक के परिजनों ने अपनी भूमिका निभाई और प्रदर्शन के माध्यम से अपनी बात प्रबंधन के समक्ष रखी… अब मुआवजा अपनी जगह है लेकिन जिस हादसे में फायर एनओसी और सुरक्षा इंतजामात को लेकर फेक्ट्री प्रबंधन की भारी लापरवाही सामने आई है उस पर कारवाई की जवाबदारी किसकी है और क्या कारवाई हो रही है ? और आगे से ऐसे हादसे ना हों इसे लेकर प्रशासन कितना सजग है…? वहीं सत्तापक्ष तो मुआवजे की राजनीति कर मामलों से पल्ला झाड़ कर शांतिपूर्ण निपटारे उचित मानता है लेकिन क्या विपक्ष भी इसी राह पर है !
मालवा पेट्रो फैक्ट्री में सोमवार सुबह आग लगने से जो चार मजदूर झुलस गए थे उनमें से एक की इलाज के दौरान मोत हो गयी । मामलें में पुलिस जांच में सामने आया कि फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से मजदूरों से बगैर किसी सुरक्षा उपकरण के खतरनाक काम कराया जा रहा था, जिस कारण यह हादसा हुआ। मालवा पेट्रो प्रोडक्ट्स प्रायवेट लिमिटेड फेक्ट्री झांझरवाडा के प्रबंधक व संचालक के द्वारा वेल्डिग का काम करते समय मजदुरो के लिये किसी प्रकार के सुरक्षा उपाय नही किये गये थे नही मौके पर आग बुझाने के लिये पानी कि व अग्नीशमन की व्यवस्था थी और प्रबंधक द्वारा घोर लापरवाही बरती गई ।
बघाना थाना प्रभारी आर एस डांगी ने बताया की सम्पुर्ण मर्ग जांच से मालवा पेट्रो प्रोडक्ट्स प्रायवेट लिमिटेड फेक्ट्री झांझरवाडा के प्रबंधक व संचालक के विरूद्ध अपराध धारा 106(1) बीएनएस का पाया जाने से फेक्ट्री के प्रबंधक व संचालक के विरूद्ध अपराध धारा 106(1) बीएनएस के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है ।
इस मुद्दे पर पुलिस ने अपनी भूमिका निभाई और कारवाई की… लेकिन प्रशासन को भी सक्रीय हो कर मामले में संज्ञान लेना चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए की हादसे की वजह के रूप में जिस तरह नियमों की अव्हेलना और सुरक्षा खामियां सामने आई हैं उस पर कड़ी कारवाई हो, सजा मिले और आगे से ऐसे हादसे जिले में कंही पर भी ना हो उसके लिए संस्थान के मालिकों नियमों का पालन करवाने के लिए पाबंद करना चाहिए ।
यहाँ उल्लेखनीय है की सत्तापक्ष और लापरवाह संस्थान तो हमेशा मुआवजा दे कर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ कर मामले को शांत करना उचित समझते हैं । जब सत्तापक्ष जिम्मेदारी से मुंह मोड़े और कसौटी पर खरा ना उतरे तभी तो यह आलम है। प्रशासन यदि कटघरे में है तो यह सत्तापक्ष और जनप्रतिनिधीयों के ही असफलता है और इसीलिए सत्तापक्ष से आए दिन सवाल पूछे जाते हैं । लेकिन क्या विपक्ष भी न्याय और कारवाई के बदले मुआवजे की राशि को तोलना समुचित मानता है ! यह कैसा चलन है ? क्या जीवन मृत्यु के सवाल पर विपक्ष को भी मात्र मुआवजे से संतुष्ट हो कर चुप बैठ जाना चाहिए ?
आखिर घोर लापरवाही और अनदेखी से हुए ऐसे हादसों और भविष्य में श्रमिकों की सुरक्षा से सबंधित मामलों में ऐसी भयावह घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो और जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कारवाई करवा कर न्याय दिलाने के लिए विपक्ष को खड़ा क्यों नही होना चाहिए !