डेस्क न्यूज
22 December, 2025
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नीमच। केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) से महात्मा गांधी का नाम हटाने की कथित साजिश और श्रमिकों के अधिकारों में कटौती के विरोध में सोमवार को जिला कांग्रेस कमेटी नीमच द्वारा जोरदार धरना प्रदर्शन किया गया। यह धरना दोपहर में भारत माता फोर जीरो चौराहा पर आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, पदाधिकारी और ग्रामीण क्षेत्रों से आए श्रमिक शामिल हुए।
धरना प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण मजदूरों को रोजगार का कानूनी अधिकार देने वाला ऐतिहासिक कानून है। इस योजना से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाने का प्रयास उनके विचारों और ग्रामीण स्वावलंबन के सिद्धांतों पर सीधा हमला है। वक्ताओं ने इसे एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा कि इससे करोड़ों गरीबों और श्रमिकों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है।
धरने के पश्चात कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन कलेक्टर प्रतिनिधि नायब तहसीलदार को सौंपा। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि केंद्र सरकार मनरेगा के स्वरूप में बदलाव कर इसके वित्तीय भार को राज्यों पर डाल रही है, जिससे इस कानून को धीरे-धीरे कमजोर करने और समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली मनरेगा योजना पर संकट खड़ा हो गया है।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती ने कहा कि केंद्र सरकार गांधीजी के नाम और मूल्यों को मिटाने का प्रयास कर रही है। मनरेगा से नाम हटाने का कदम केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि उस विचारधारा पर प्रहार है, जिसने गांवों को आत्मनिर्भर बनाने का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मजदूरों की लंबित मजदूरी का समय पर भुगतान नहीं किया जा रहा, जिससे गरीब परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
कांग्रेस ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की कि मनरेगा योजना के नाम से महात्मा गांधी का नाम हटाने संबंधी किसी भी निर्णय को तत्काल वापस लिया जाए। साथ ही श्रमिकों की लंबित मजदूरी का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाए, योजना का वित्तीय बोझ राज्यों पर डालने की नीति समाप्त की जाए और केंद्र सरकार अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी का निर्वहन करे। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मजदूर विरोधी नीतियां वापस नहीं ली गईं, तो आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा।