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खाकी पर दाग ! जावद ASI की लापरवाही ने उजाड़ा हँसता-खेलता परिवार - 3 घंटे तक हाईवे जाम, गुस्से में फूटा जनसैलाब | पढ़िए सड़क हादसे की दर्दनाक दास्तां द वॉचमैन पोस्ट पर...

न्यूज डेस्क 08 November, 2025 अन्य

नीमच | नीमच ज़िले के जावद-नीमच मार्ग पर शुक्रवार शाम जो दर्दनाक हादसा हुआ, उसने न सिर्फ एक हँसते-खेलते परिवार को तबाह कर दिया, बल्कि खाकी की मर्यादा को भी मिट्टी में मिला दिया। जिस पुलिस वर्दी को जनता की सुरक्षा के लिए जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उसी वर्दीधारी ने नशे में चूर होकर मासूम ज़िंदगियाँ छीन लीं।

हादसे की दर्दनाक दास्तां
शुक्रवार शाम जावद थाने में पदस्थ एएसआई मनोज यादव अपनी कार से तेज़ रफ्तार और लापरवाही से निकल रहे थे। बीच रास्ते में भरभड़िया और महेशपुरिया के बीच उन्होंने दो बाइकों को इतनी जबरदस्त टक्कर मारी कि पलभर में सब कुछ बिखर गया।
इस हादसे में ज्ञानोदय आईटीआई के कर्मचारी दशरथ सिंह पिता शंभू सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। उनकी पत्नी ललिता, 10 वर्षीय बेटा हर्षित और 6 वर्षीय बेटी जया गंभीर रूप से घायल हो गए।
ललिता और जया नीमच के निजी अस्पताल में ज़िंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही हैं, जबकि हर्षित का पैर बुरी तरह कुचल जाने के कारण डॉक्टरों को उसे काटना पड़ा। 

3 घंटे तक उबाल में रहा जनाक्रोश, हाईवे पर लगा लंबा जाम
हादसे की खबर जैसे ही आसपास के गांवों में पहुँची, गुस्से की लहर दौड़ पड़ी। पहले नीमच और जावद में सड़कें जाम की गईं, फिर सैकड़ों ग्रामीण भरभड़िया फंटे पर एकत्र हो गए और तीन घंटे तक हाईवे जाम रखा।
ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग प्रशासन के सामने रखी।
मौके पर पहुंचे एसडीएम संजीव साहू, सीएसपी किरण चौहान, एसडीओपी रोहित राठौर सहित भारी पुलिस बल और कई जनप्रतिनिधियों ने लोगों को समझाने का प्रयास किया। अंततः प्रशासन के आश्वासन के बाद जाम खोला गया।

प्रशासन का आश्वासन, पर दर्द असीमित
एसडीएम संजीव साहू ने बताया कि पीड़ित परिवार को रेडक्रॉस से ₹50,000 की आर्थिक सहायता दी गई है। इसके अलावा “संबल योजना” के तहत राशि देने और मुख्यमंत्री राहत कोष से ₹5 लाख की सहायता का प्रस्ताव भेजा गया है।
हालांकि परिवार द्वारा की गई सरकारी नौकरी की मांग फिलहाल नियमों में संभव नहीं बताई गई।

टूटा एक परिवार, बिखर गए सपने
एक पल की लापरवाही ने एक पूरे परिवार की ज़िंदगी उजाड़ दी। अब उस माँ की हालत सोचिए — जो खुद मौत से जूझ रही है और उसे यह भी नहीं पता कि उसका पति अब इस दुनिया में नहीं रहा… और उसका छोटा बेटा एक पैर से हमेशा के लिए अपंग हो गया।
समाजजन और रिश्तेदारों की आंखें नम हैं, गाँव में सन्नाटा पसरा है - हर किसी के मन में बस एक ही सवाल की क्या यही है कानून की रक्षा करने वाले का चेहरा?

खाकी पर कलंक : जब रक्षक ही बना भक्षक
आरोप है कि एएसआई मनोज यादव हादसे के वक्त दारू के नशे में धुत थे। गाड़ी से शराब की बोतलें भी बरामद हुईं।
एसपी अंकित जायसवाल ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। लेकिन अब सवाल यह है कि — क्या केवल निलंबन काफी है? क्या कानून उस मासूम परिवार को न्याय दिला पाएगा?

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