डेस्क न्यूज़
30 October, 2025
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नीमच। जिले के सरपंच संघ संयुक्त मोर्चा ने गुरुवार को जनपद पंचायत नीमच के सभा कक्ष में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की, जिसमें जिलेभर के सरपंच बड़ी संख्या में शामिल हुए। बैठक में पंचायतों के घटते अधिकारों और प्रशासनिक दखलअंदाजी को लेकर सरपंचों ने गहरी नाराजगी जताई और पंचायतों की स्वायत्तता बहाल करने का संकल्प लिया।
बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि ग्राम पंचायतों को पुनः सशक्त बनाने और उनके अधिकारों की बहाली के लिए अब सरपंच सीधे सरकार से संवाद करेंगे। इस दिशा में पहला बड़ा कदम 11 नवंबर को भोपाल के जम्बूरी मैदान में उठाया जाएगा, जहां प्रदेशभर के सरपंचों का विशाल प्रदेश स्तरीय सम्मेलन आयोजित होगा। इस सम्मेलन में मुख्यमंत्री, मंत्रीगण, प्रमुख सचिव सहित शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को आमंत्रित किया जाएगा, ताकि पंचायतों की वास्तविक समस्याएं सीधे सरकार तक पहुंच सकें।
सरपंचों ने कहा कि 2003 से पहले ग्राम पंचायतें वास्तविक अर्थों में सशक्त थीं, परंतु अब उनके अधिकार लगभग समाप्त कर दिए गए हैं। आज स्थिति यह है कि पंचायतों के पास राशन कार्ड जारी करने जैसे बुनियादी अधिकार भी नहीं बचे हैं। पहले ग्रामसभा के प्रस्तावों से विकास कार्य तय होते थे, लेकिन अब पंचायतें केवल औपचारिक संस्था बनकर रह गई हैं।
बैठक में प्रदेश अध्यक्ष गोपाल सिंह पवार (फौजी), प्रदेश महासचिव राजेश चतुर्वेदी, महामंत्री बद्रीदास बैरागी, उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह सोलंकी, मंदसौर जिला अध्यक्ष लाला गुर्जर और नीमच जिला अध्यक्ष महेंद्र सिंह शक्तावत सहित बड़ी संख्या में सरपंच उपस्थित रहे।
नीमच जिला अध्यक्ष महेंद्र सिंह शक्तावत ने कहा कि ग्राम पंचायतों की स्थिति आज बेहद दयनीय हो गई है। सरकार केवल आदेश जारी करती है, जबकि जिम्मेदारी पूरी तरह सरपंचों पर डाल दी जाती है। मनरेगा योजनाओं में सामग्री भुगतान रुके होने और मजदूरों के खातों में राशि वापस न आने जैसी समस्याओं ने पंचायतों की कार्यप्रणाली को पंगु बना दिया है।
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि सरपंच अपने हक और अधिकारों की लड़ाई स्वयं लड़ें और पंचायत राज की मूल भावना को पुनर्जीवित करें। नीमच से उठी यह आवाज अब पूरे प्रदेश में गूंजने को तैयार है, और 11 नवंबर को भोपाल का जम्बूरी मैदान इस ऐतिहासिक एकजुटता का साक्षी बनेगा।