डेस्क न्यूज़
29 October, 2025
प्रशासनिक
नीमच। शहर के बीचोंबीच स्थित सब्ज़ी मंडी कभी ताज़गी की पहचान हुआ करती थी, आज यह प्रशासन की नाकामी का प्रतीक बन चुकी है। दशकों पुरानी यह मंडी अब सड़क पर उतर आई है। ठेले वाले और फल विक्रेता बीच सड़क पर कब्ज़ा जमाए बैठे हैं। विरोध करने पर आम लोगों से झगड़ा, दुकानदारों से हाथापाई —अब रोज़ का तमाशा बन चुका है।
पर हैरानी की बात यह है कि यह सब उस जगह हो रहा है, जहाँ सिस्टम की हर बड़ी आँख मौजूद है।
सिर्फ 100 मीटर की दूरी पर यातायात थाना
50 मीटर पर एसपी कार्यालय
70 मीटर पर केंट थाना
और 40 मीटर पर विधायक दिलीप सिंह परिहार का बंगला
फिर भी कानून सड़क पर दम तोड़ रहा है।
यातायात प्रभारी अमित सारस्वत ने शुरुआती दिनों में कार्रवाई जरूर की, ठेले हटवाए, चालान काटे — लेकिन अब नज़रें फेर ली हैं। ट्रैफिक फिर उसी ढर्रे पर लौट आया है।
इस पूरे अव्यवस्था के बीच नीमच नगरपालिका की भूमिका सबसे संदिग्ध और सवालों के घेरे में है।
ताज्जुब की बात यह है कि जिन ठेलेवालों ने सड़क पर कब्ज़ा किया है, उन्हीं से नगरपालिका का नुमाइंदा हर महीने हर दिन रुपए लेकर रसीद काटता है।
यानि अवैध कब्ज़े को बाकायदा वैधता दी जा रही है।
दिलीप सिंह परिहार का बंगला मंडी से बस कुछ कदमों की दूरी पर है। बताया जाता है कि उनका बड़ा वाहन कई बार जाम में फँस चुका है, लेकिन फिर भी स्थिति जस की तस है।
सबसे भयावह स्थिति ज़िला अस्पताल की है, जो महज़ 100 मीटर की दूरी पर है। ट्रैफिक जाम में फँसने से कई बार इमरजेंसी मरीजों को देर से पहुँचना पड़ता है। स्थानीय लोग कहते हैं — अगर किसी की जान जाम में चली जाए, तो जिम्मेदार कौन?
शहर के बीचोंबीच इतनी बड़ी अव्यवस्था के बावजूद पूरा सिस्टम कान में तेल डालकर बैठा है। सवाल यह है कि जब सत्ता और सिस्टम के दफ्तर इसी सड़क पर हैं, तो आम नागरिक की सुनवाई शहर के दूसरे कोनों में कैसी होगी?
इस मुद्दे पर सीएमओ दुर्गा बामनिया ने चर्चा करना चाही लेकिन उन्होंने कॉल अटेंड नहीं किया-----
जबकि --
यातायात प्रभारी अमित सारस्वत ने कहा कि सीएमओ दुर्गा बामनिया से चर्चा की है। कल ही संयुक्त रूप से कार्यवाही कर सड़क को कब्जामुक्त करेंगे। दुकानदारों को भी नहीं बख्शा जाएगा।