डेस्क न्यूज़
24 October, 2025
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नीमच | शहर के मेहनोत नगर स्थित पाटीदार हॉस्पिटल में शुक्रवार को इलाज के दौरान 5 वर्षीय बालिका की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। आक्रोशित परिवार ने डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
परिजनों का कहना है कि डॉक्टर मुकेश पाटीदार ने बच्ची को हेवी डोज़ दे दी, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई और कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। आरोप है कि डॉक्टर ने परिजनों को गुमराह करते हुए मृत बच्ची को एंबुलेंस से उदयपुर रेफर करने की बात कही।
एंबुलेंस चालक पर भी आरोप
परिजनों के मुताबिक, रास्ते में एंबुलेंस चालक ने वाहन खराब होने का बहाना बनाकर उन्हें बीच रास्ते में छोड़ दिया और खुद नीमच लौट आया। बाद में जब परिवार वापस अस्पताल पहुंचा, तो पाया कि वही एंबुलेंस और चालक अस्पताल परिसर में पहले से मौजूद थे। इससे गुस्साए परिजनों ने हॉस्पिटल के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
थैलेसीमिया से पीड़ित थी बच्ची
मृतका की पहचान डिंपल (5) पुत्री विकास अंजना, निवासी ग्राम बरकटी थाना छोटी सादड़ी, के रूप में हुई है। वह इन दिनों केसुन्दा में अपने नाना-नानी के पास रह रही थी। परिजनों के अनुसार, डिंपल थैलेसीमिया की मरीज थी और बीते पांच वर्षों से पाटीदार हॉस्पिटल में उसका इलाज चल रहा था। हर माह रक्त चढ़ाने के लिए उसे अस्पताल लाया जाता था।
गुरुवार को भी बच्ची को खून चढ़ाया गया था, जिसके बाद उसे पेट दर्द और बेचैनी होने लगी। हालत गंभीर होने पर डॉक्टर ने रेफर करने की सलाह दी, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई।
“डॉक्टर ने हैवी डोज़ देकर ली जान” — परिजन
मृतका के नाना प्रभुलाल अंजना और पिता विकास अंजना ने आरोप लगाया कि डॉक्टर मुकेश पाटीदार ने इलाज में गंभीर लापरवाही की। “बच्ची की मौत के बाद भी हमें गुमराह किया गया और रेफर करने का नाटक रचा गया,” परिजनों ने कहा। उनका कहना है कि जब तक डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती, वे जिला अस्पताल परिसर में धरना देंगे।
पुलिस जांच में जुटी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
घटना की जानकारी मिलते ही सिटी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत कराया। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाकर मर्ग कायम किया है। आगे की जांच जारी है।
डॉक्टर का पक्ष
डॉ. मुकेश पाटीदार ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि बच्ची जन्म से ही थैलेसीमिया की मरीज थी। “पिछले पांच वर्षों में उसे करीब 70 बार रक्त चढ़ाया गया है। खून चढ़ाने के दौरान रिएक्शन की संभावना हमेशा रहती है। जब स्थिति बिगड़ी, तो हमने उदयपुर के विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेकर रेफर किया था,”